बिना दहेज़ के
अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए, उसके चहरे पर पहले तो बिल्कुल मासूम सी मुस्कराहट फैल जाती है, फिर वह मुस्कराहट उदासी में बदलते हुए पलकों पर अश्रु के बूँदों के रूप में नज़र आने लगती है। फिर थोड़ा नाख़ुश सा होकर कहती है, मैँ कहती थी ना पुरानी बातें तकलीफ़ देती है, ना जाने क्यों तुम हमेशा गुजरे ज़माने की बातें करते हो? उसने बताया कि वह बचपन में बहुत शरारती थी, घर में सबसे छोटी थी तो सबकी लाडली भी थी। निश्चय ही वह बचपन में बहुत खूबसूरत और चंचल रही होगी। उसके दो बड़े भाई और दो बड़ी बहनें है।बहुत कहने पर उसने अपनी संक्षिप्त आपबीती सुनाई, उसने बताया कि जब वह बारहवीं कक्षा में थी तो उसके घर पर उसके छोटे भैया का दोस्त आया करता था, परिवार में सब लोग उसके व्यक्तित्व और व्यवहार से प्रभावित थे। वह अक्सर छोटे भैया के साथ ही आता और हल्का - फुल्का चाय नाश्ता करके फिर भैया के साथ ही चला जाता था। पहली बार जब मैं उनदोनों को चाय देने गई तो वह लड़का मुझे बहुत ही उदास नजरों से देर तक देखता रहा था। धीरे - धीरे उसका घर पर आना - जाना बढ़ गया था, मुझे भी वह अच्छा लगता था मगर हमारे बीच एक - दूसरे को देखने के अलावा ...