मन ठीक नहीं है।
"नोएडा के उस कमरे से उठता एक सवाल" कुछ खबरें पढ़कर हम आगे बढ़ जाते हैं। कुछ खबरें भीतर कहीं रुक जाती हैं। राकेश मेहता की मौत की खबर भी ऐसी ही है। दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव, 1975 बैच के आईएएस अधिकारी, करीब चार दशक तक प्रशासन में रहे, दिल्ली की व्यवस्था को बहुत करीब से देखा और उसे बनाने में भूमिका निभाई। दिल्ली नगर निगम के आयुक्त रहे, दिल्ली के मुख्य सचिव रहे और 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स के समय महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। जिन लोगों के साथ उन्होंने काम किया, वे उन्हें एक अनुभवी और प्रभावशाली अधिकारी के रूप में याद करते हैं। लेकिन जीवन के आखिरी दिनों में वे नोएडा के सेक्टर 82 में एक किराये के फ्लैट में अकेले रह रहे थे। 6 सितंबर को वहीं उनकी मौत हुई। पुलिस को एक नोट मिला, जिसमें लंबे समय से चली आ रही बीमारी और स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का उल्लेख था। पुलिस के मुताबिक उन्होंने किसी को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार नहीं बताया था। उनके परिवार के सदस्य दूसरे शहर और देश में रहते थे। मामले की जांच चल रही है। इन बातों के आगे हमें रुक जाना चाहिए। क्योंकि किसी व्यक्ति के मन में उस आखि...