इलाहाबाद यूनिवर्सिटी 1955
मेरे पिताजी 1955 के आसपास इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे तो बच्चन जी और फ़िराक़ साहब उन्हें अंग्रेजी पढ़ाते थे,उस समय छात्र बड़े आसानी से अपने टीचर के घर जाते थे,पिताजी बताते थे फिराक साहब अकेले रहते थे घर में उनके कोई परिवार के लोग और काम करने वाले रहते थे,फिराक साहब बड़ी शान से रहते थे छात्रों को बटर टोस्ट खिलाते और कॉफी पिलाते थे, फ़िराक़ साहब ही अकेले ऐसे आदमी थे जो नेहरू को हमेशा जवाहर कहते थे, उस समय पृथ्वीराज कपूर भी अपने दो नाटक पैसा और पठान लेकर इलाहाबाद आए थे,तब इलाहाबाद की छात्र यूनियन के सदस्य पृथ्वीराज से मिलने गए थे,मेरे पिताजी भी गए थे,वो लोग यूनियन के लिए एक चैरिटी शो करवाना चाहते थे, पृथ्वीराज ने मना कर दिया,बोले उन्होंने अपने दो हिट नाटकों पर आधारित दो फिल्म बनाई जिसमें उनका पैसा डूब गया,दोनों फिल्में फ्लॉप रही उन फिल्मों के लिए उन्होंने अपने बेटे राज से दो लाख रुपए उधार किया था,वो बोल रहे थे कि वो अपने बेटे का कर्ज लेकर मरना नहीं चाहते,इसीलिए फिर से अपने पृथ्वी थिएटर को लेकर देश में घूम रहे थे ताकि अपने बेटे का कर्ज चुकता कर सकें, बच्चन जी सिविल लाइंस में र...