मोहनजोदड़ो
एक लड़की अचानक ऐसी भाषा बोलने लगी जो हजारों साल पुरानी थी 1. वो मंगलवार 12 अगस्त 2025। सावन का महीना। वाराणसी के अस्सी घाट के पास, गली में रहने वाला तिवारी परिवार। पंडित शंभू तिवारी, 50 साल, संस्कृत के टीचर। पत्नी उमा, 46 साल, गृहिणी। बेटी अनन्या, 17 साल, 12वीं में थी। सीधी-सादी, टॉप करने वाली लड़की। भरतनाट्यम सीखती थी। मंगलवार की सुबह 6 बजे अनन्या रोज़ की तरह रियाज़ कर रही थी। माँ ने चाय के लिए आवाज़ दी। "अनन्या बेटा, नीचे आ जा।" अनन्या सीढ़ियों से उतरी। पर चेहरा बदला हुआ था। आँखें लाल। होंठ सूखे। उमा ने पूछा, "क्या हुआ बेटा? तबियत ठीक नहीं?" अनन्या ने उमा को देखा। और बोलना शुरू किया। पर वो आवाज़ अनन्या की नहीं थी। भारी, गूँजती हुई। और भाषा हिंदी नहीं थी। संस्कृत भी नहीं। कोई और। "अहम् जागृतास्मि। कः कालः? कुत्र अस्मि?" उमा के हाथ से चाय गिर गई। "हे भगवान! ये क्या बोल रही है?" शंभू भागे आए। संस्कृत के प्रोफेसर थे। पर ये संस्कृत नहीं थी। कुछ शब्द मिलते जुलते थे, पर व्याकरण अलग। उच्चारण अलग। अनन्या लगातार बोल रही थी। आँखें बंद। हाथ की मुद्र...