“जो चीज़ें पहली नज़र में बहुत कूल लगती हैं, उनकी सबसे बड़ी कमज़ोरी यही होती है कि उनका असर ज्यादा दिन नहीं टिकता।”
प्रसिद्ध साहित्यकार शिवानी की बेटी ईरा पांडे अपनी माँ की जीवनी में एक दिलचस्प प्रसंग दर्ज करती हैं। वह लिखती हैं कि उनके नाना के ठीक बगल वाले घर में डेनियल पंत रहते थे, जिन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था। नाना की सोच काफ़ी रूढ़िवादी थी, इसलिए उन्होंने दोनों घरों के बीच एक दीवार खड़ी करवा दी—ताकि “उनकी दुनिया” और “हमारी दुनिया” अलग-अलग रहें। घर में सख़्त निर्देश थे कि उस तरफ़ न देखा जाए, न कोई मेल-जोल हो। शिवानी ने कहीं लिखा है कि डेनियल पंत के घर से उठने वाली मसालेदार मांस की खुशबू उनके साधारण ब्राह्मण रसोईघर तक पहुँच जाती थी और उनकी दाल, आलू की सब्ज़ी और चावल को फीका बना देती थी। यह वर्णन उसी घर का था, जिसके मुखिया तारादत्त पंत ने 1874 में हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया था—और इस तरह वे कुमाऊँ की उस “नीरस” ब्राह्मण रसोई से आज़ाद हो गए थे। इसी डेनियल पंत की बेटी आयरीन रूथ पंत ने आगे चलकर अपने से दस साल बड़े, पहले से विवाहित और पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान से विवाह किया। इसके साथ ही उन्होंने ईसाई धर्म छोड़कर इस्लाम स्वीकार कर लिया। दिलचस्प बात यह है कि लियाकत अली खा...