Yugi
*समझौता नहीं साहस* हनीमून से लौटते ही पति ने हाथ उठाने की कोशिश की, लेकिन खेल शिक्षिका के पास ऐसा सबूत था जिसने पूरे परिवार की साज़िश उजागर कर दी! शादी के सात दिन बाद, मसूरी से लौटते ही आदित्य ने गाज़ियाबाद वाले फ्लैट का मुख्य दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया। उसने कुंडी चढ़ाई। धीरे-धीरे अपनी चमड़े की बेल्ट निकाली। फिर नई-नवेली दुल्हन सिया से बोला, “अब तुम्हें सिखाना पड़ेगा कि इस घर की बहू कैसे बनकर रहती है।” सिया वहीं ठिठक गई। उसके हाथ में अभी भी पहाड़ों से लाया हुआ छोटा सूटकेस था। माथे की बिंदी हल्की धुंधली हो चुकी थी। हाथों की मेहंदी अभी पूरी तरह फीकी भी नहीं पड़ी थी। कुछ घंटे पहले तक जो पति हर जगह उसका हाथ थामे घूम रहा था, अब उसी के हाथ में बेल्ट थी। सिया की उम्र 25 वर्ष थी। वह गाज़ियाबाद के एक सरकारी विद्यालय में खेल शिक्षिका थी। बच्चे उसका सम्मान करते थे क्योंकि वह अनुशासन, आत्मविश्वास और आत्मरक्षा की ट्रेनिंग भी देती थी। उसका स्वभाव शांत था। कम बोलती थी। यही कारण था कि लोग अक्सर उसकी चुप्पी को उसकी कमजोरी समझ बैठते थे। लेकिन सच्चाई बिल्कुल अलग थी। सिया का बचपन उत्तराखंड के एक छो...