Posts

Showing posts from January, 2021

एक पूरा पहाड़

Image
 किसी रोज़ मैं तुम्हारे लिए  एक पूरा पहाड़ बनाऊंगा- मैं उसकी छाती पर  चीर के पेड़ लगाऊंगा  हर उस दिन के लिए-एक  जिस दिन मैं तुमसे नहीं मिल पाया। वो पहाड़ हरी घास से ढका होगा, उतना ही जितना  ढक कर रखते हैं तुम्हारे ख्याल मुझे।  उसमें एक झरना भी होगा,  जो तुम्हारे हंसते ही  फूट पड़ेगा वक़्त के पत्थरों से।  और उसमें मैं समेट दूंगा  तमाम आंसू कि वो अब कभी हिम्मत न करें  उन आंखों से निकलने की।  उसकी चोटी पर होगा  एक गांव- जहां बचपन से लेकर अभी तक  देखा तुम्हारे हर खूबसूरत सपने  को दूंगा मैं एक मकाँ।  काफी उम्र होने पे जब इस कविता के बाल सफेद हो जाएं, और शब्दों को पड़ जाएं झुर्रियां तब उस पहाड़ पर  मैं चला जाऊंगा रहने  और रहूंगा वहां  तब तक-जब तक  तुम फुर्सत नहीं निकाल पाओ  और  नक्शा न ढूंढ पाओ उस पहाड़ तक  पहुंचने का।  डरना मत तुम आराम से आना मैं मरूंगा नहीं क्योंकि देवता मर सकते हैं प्रेम और पहाड़ कभी नहीं।।