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Showing posts from August, 2021

इंसान

 पापा पापा मुझे चोट लग गई खून आ रहा है 5 साल के बच्चे के मुँह से सुन ना था की पापा सब कुछ छोड़ छाड़ कर गोदी में उठा उठा कर 1 किलो मीटर की दुरी पर क्लिंनिक तक भाग भाग कर ही पहुँच गए दुकान केस काउंटर सब नोकर के भरोसे छोड़ आये सीधा डाक्टर के केबिन में दाखिल होते हए डॉक्टर को बोले देखिये देखिये डॉक्टर मेरे बेटे को क्या हो गया डॉक्टर साहब ने देखते हुए कहा अरे जैन साहब घबराने की कोई बात है मामूली चोट हे ड्रेसिंग कर दी है ठीक हो जायेगा डॉक्टर साहब कुछ पेन किलर लिख देते दर्द कम होजाता अच्छी से अच्छी दवाईया लिख देते ताकि जल्दी ठीक हो जाये गांव भर जाये *डाक्टर* अरे जैन साहब क्यों इतने चिंतित हो रहे हो कुछ नही हुआ है 3-4दिन में ठीक हो जायेगा पर डॉक्टर साहब इसको रात को नींद तो आजायेगी न  *डॉक्टर* अरे हा भाई हा निश्चिन्त रहो   बच्चे को लेकर लौटे तो नोकर बोला सेड़जी आपका ब्रांडेड महंगा शर्ट  खराब हो गया खून लग गया अब ये दाग नही निकलेंगे *जैन साहब* कोई नी  ऐसे शर्ट बहुत आएंगे जायेंगे मेरे बेटे का खून बह गया वो चिंता खाये जा रही है कमजोर नही हो जाये तू जा एक काम थोड़े सूखे मे...

हरिशंकर परसाई जी की स्मृतियों को सादर नमन

1. निन्दा में विटामिन और प्रोटीन होते हैं. निन्दा खून साफ करती है, पाचन क्रिया ठीक करती है, बल और स्फूर्ति देती है. निन्दा से मांसपेशियां पुष्ट होती हैं. निन्दा पायरिया का तो सफल इलाज है. सन्तों को परनिन्दा की मनाही है, इसलिये वे स्वनिन्दा करके स्वास्थ्य अच्छा रखते हैं. 2. जूते खा गए! अजब मुहावरा है? जूते तो मारे जाते हैं। वे खाये कैसे जाते हैं? लेकिन भारतवासी इतना भुक्खड़ है कि जूते भी खा जाता है। 3. अश्लील पुस्तकें कभी जलाई नहीं गईं। वे अब  अधिक व्यवस्थित ढंग से पढ़ी जा रही हैं। 4. इस देश के बुद्धिजीवी शेर हैं, पर वे सियारों की बरात में बैंड बजाते हैं. 5. जो कौम भूखी मारे जाने पर सिनेमा में जाकर बैठ जाये, वह अपने दिन कैसे बदलेगी! 6. अच्छी आत्मा फोल्डिंग कुर्सी की तरह होनी चाहिये. जरूरत पडी तब फैलाकर बैठ गये, नहीं तो मोडकर कोने से टिका दिया. 7. अद्भुत सहनशीलता और भयावह तटस्थता है इस देश के आदमी में. कोई उसे पीटकर पैसे छीन ले तो वह दान का मंत्र पढने लगता है. 8. अमरीकी शासक हमले को सभ्यता का प्रसार कहते हैं. बम बरसते हैं तो मरने वाले सोचते है, सभ्यता बरस रही है. 9. चीनी नेता लडकों के ...

मैं न होता तो क्या होता...!!

 *एक बार कागज़ का एक टुकड़ा हवा के वेग से उड़ा और पर्वत के शिखर पर जा पहुँचा।पर्वत ने उसका आत्मीय स्वागत किया और कहा-भाई ! यहाँ कैसे पधारे ?* *कागज़ ने कहा-अपने दम पर।जैसे ही कागज़ ने अकड़ कर कहा अपने दम पर और तभी हवा का एक दूसरा झोंका आया और कागज़ को उड़ा ले गया।*  *अगले ही पल वह कागज़ नाली में गिरकर गल-सड़ गया। जो दशा एक कागज़ की है वही दशा हमारी है।*  *पुण्य की अनुकूल वायु का वेग आता है तो हमें शिखर पर पहुँचा देता है और पाप का झोंका आता है तो रसातल पर पहुँचा देता है।* *किसका मान ? किसका गुमान ? सन्त कहते हैं कि जीवन की सच्चाई को समझो। संसार के सारे संयोग हमारे अधीन नहीं हैं। कर्म के अधीन हैं और कर्म कब कैसी करवट बदल ले, कोई भरोसा नहीं। इसलिए कर्मों के अधीन परिस्थितियों का कैसा गुमान ?*  *बीज की यात्रा वृक्ष तक है,*   *नदी की यात्रा सागर तक है,*   *और...*  *मनुष्य की यात्रा परमात्मा तक..*  *संसार में जो कुछ भी हो रहा है वह सब ईश्वरीय विधान है,....*   हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं,  इसीलिये कभी भी यह भ्रम न पालें कि... मै...