Posts

Showing posts from December, 2021

क़िस्से-कहानियों का सताया हुआ लोकतंत्र

हमें बचपन से यह पढ़ाया गया है कि फलाने राजा ने ख़ुश होकर फलाने व्यक्ति को स्वर्ण मुद्राएँ दीं। बस यहीं से हमारे मस्तिष्क को कैप्चर करने का खेल शुरू हो गया। हम कलाकार हैं तो अपनी कला से राजा को ख़ुश करने में लगे रहे। हम विद्वान हुए तो अपनी विद्वत्ता से राजा को ख़ुश करते रहे। हम चतुर हुए तो अपना समस्त चातुर्य राजा को ख़ुश करने में झोंक दिया। बुद्धिमान हुए तो बुद्धिमत्ता राजा को ख़ुश करने में जुट गयी।  मतलब यह कि कला, विद्वत्ता, चातुर्य और बुद्धिमत्ता; राजा से स्वर्ण मुद्राएँ पाने की होड़ में व्यस्त हो गयीं और राजा इन सबको काम पर लगाकर शासन में अपनी मनमानी करके ख़ुश रहा।  इन्हीं कहानियों ने हमें यह भी बताया कि नगर की समस्त सुंदर कन्याओं का अंतिम उद्देश्य यही है कि राजकुमार उनके सौंदर्य पर मोहित हो जावे। इसलिए आज भी सत्ताधीशों के राजकुँवर सुन्दर कन्याओं पर आकृष्ट होकर उनका जीवन धन्य करते पकड़े जाते हैं। इन कहानियों के अनुसार राजा के दो ही काम थे- प्रथम, अपने मंत्रियों से ऊल-जलूल सवाल पूछना और द्वितीय, आखेट करना। इन दोनों से जो समय बचता था, वह रूठी रानी को मनाने में व्यतीत हो जाता था। मंत्र...

जन्म कुंडली

  जब दोनों भाई राजकीय सेवा में चयनित हो गए तो अपने-अपने परिवार सहित सरकारी भवन में रहने चले गए! अब बूढ़े माता-पिता की पूरी जिम्मेदारी वैष्णवी पर आ गई! उसने भी मां-बाप की देखभाल में जी जान लगा दिया! लेकिन इसका परिणाम यह हुआ कि पहले उसके विवाह की चिंता करने वाले मां-बाप अब बिल्कुल उदासीन हो गए!  उसकी उम्र बढ़ने लगी और शादी का जिक्र घटने लगा!  शुरू में ऐसे रिश्ते ढूंढे गए जिसमें मां-बाप साथ रह सके, पर बात बनी नहीं!  धीरे धीरे उम्र इतनी हो गई कि अच्छे रिश्ते आने बंद हो गए! अपनी सहेलियों के जोर देने पर जब वैष्णवी ने स्वयं के स्तर पर रिश्ता ढूंढना शुरू किया तो चालीस-चालीस साल के कुंवारों ने ऐसी-ऐसी बातें कीं, कि उसे उबकाई आने लगी!   माता-पिता तो उदासीन थे ही, अब उसने भी शादी के बारे में सोचना छोड़ दिया!  एक दिन ऑफिस से लौटी तो दरवाजे पर अपना जिक्र सुनकर ठिठक गई!  पापा के खास दोस्त मिश्रा अंकल से पापा कह रहे थे- "क्या बताऊं मिश्रा! मैंने तो कितने ही लड़के ढूंढे, पर वैष्णवी को कोई पसंद ही नहीं आता! अब इतनी पढ़ी लिखी लड़की की शादी उसकी मर्जी के बगैर तो नही...

Refill

The whole world paused this morning.  Do you know why? Because an 8 year old’s tank was empty.  The kids had already started their school day at their desks and I was preparing to leave for work when I noticed my littlest standing in the bathroom wiping his face.  I paused at the door and asked if he was okay. He looked up with tears silently dripping and shook his head. When I questioned if something happened, again he shook his head.  So I sat on the side of the tub and pulled him in my lap. I told him sometimes our heart tanks feel empty and need to be refilled.  He cried into my chest and I held him tight.  I asked if he could feel my love filling him up?  A nod, and tears stopped...  I waited a minute...  ‘Has it reached your toes yet?’  He shook his head no...  ‘Okay dear. We will take as long as you need. Work doesn’t matter right now. School isn’t important either. This right here, is the most important thing today, okay?...