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Showing posts from June, 2023

वो पत्नी ही होती हैं जो अपनी किडनी देकर भी आदमी को नया जीवन देती हैं, वो पत्नी ही होती हैं जो हजारो होस्पिटल से कोमा में घोषित आदमी को भी जिन्दा कर देती है.... सिर्फ़ एक औरत के गलत निकलने पर पूरी दुनिया गलत नहीं हो जाती हैं..... हर मिडिल क्लास बच्चों की मां उसका पति चाहे 2000 ही कमाता हो पर वो बाहर खुद को रानी ही बताती है

 चलो इतनी सारी नेगेटिविटी के बीच तुम्हें एक पॉजिटिव चीज बताते हैं... हमारे पड़ोस में एक भईया रहते हैं... आज से लगभग पंद्रह साल पहले उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी... बस किसी तरह गुजर बसर चल रहा था... हमारे पिता जी एवं मोहल्ले के अन्य लोगो के सहयोग से उनका विवाह करवाया गया...  उस समय भईया साइकिल से कपड़े की फेरी कर रहे थे... दिन रात गली मोहल्लों में साइकिल चलाते... कभी रेडीमेड कपड़े बेचते तो कभी आइसक्रीम तो कभी मेले ठेले में रामदाना मूंगफली बेच लिया... किसी एक चीज पर टिके नहीं, मतलब जो काम मिल गया उसे कर लिया...  हालांकि मेहनत बहुत करते थे... लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए काफी नहीं था... उनकी धर्मपत्नी जी भी बहुत ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी... लेकिन व्यवहार से बहुत ही सुशील एवं सज्जन थी... विवाह के समय वो बारंहवी पास थी और भैया दसवी फेल... फिर भी उनका विवाह हो गया...  इस बीच भईया के दिमाग में पता नहीं कहां से आया उन्होंने भाभी को आगे की शिक्षा पूरी करने के लिए प्रेरित किया... पैसा जेब में फूटी कौड़ी नहीं था... फिर भी कर्जा उधार ले के बीए में एडमिशन कराया...

विरासत

 काश की हमारे लोग इसे समझ पाते....         महेश के घर आते ही बेटे ने बताया कि वर्मा अंकल आर्टिगा गाड़ी ले आये हैं। पत्नी ने चाय का कप पकड़ाया और बोली पूरे 13 लाख की गाड़ी खरीदी और वो भी कैश में। महेश हाँ हूँ करता रहा। आखिर पत्नी का धैर्य जवाब दे गया, हम लोग भी अपनी एक गाड़ी ले लेते हैं, तुम मोटर साईकल से दफ्तर जाते हो क्या अच्छा लगता है कि सभी लोग गाड़ी से आएं और तुम बाइक चलाते हुए वहाँ पहुंचो, कितना खराब लगता है। तुम्हे न लगे पर मुझे तो लगता है।        देखो घर की किश्त और बाल बच्चों के पढ़ाई लिखाई के बाद इतना नही बचता कि गाड़ी लें। फिर आगे भी बहुत खर्चे हैं। महेश धीरे से बोला।       बाकी लोग भी तो कमाते हैं, सभी अपना शौक पूरा करते हैं, तुमसे कम तनखा पाने वाले लोग भी स्कोर्पियो से चलते हैं, तुम जाने कहाँ पैसे फेंक कर आते हो। पत्नी तमतमाई।* अरे भई सारा पैसा तो तुम्हारे हाथ मे ही दे देता हूँ, अब तुम जानो कहाँ खर्च होता है। महेश ने कहा। मैं कुछ नही जानती, तुम गाँव की जमीन बेंच दो ,यही तो समय है जब घूम घाम लें हम भी ज़िंदगी जी लें। मरने क...

ज़िन्दगी ना मिलेगी दोबारा

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 ज़िन्दगी में 8 के पहाड़े की बहुत एहमियत होती है ! इसकी जानकारी सब लोगों को होना चाहिए है !  इसे ज़रूर पढ़ें : 8 x 01 = 08   ...बचपन 8 × 02 = 16   ...जवानी की शुरुआत 8 × 03 = 24   ...शादी की उम्र 8 × 04 = 32   ...बच्चों की ज़िम्मेदारी होना 8 × 05 = 40   ...खुशहाल परिवार 8 × 06 = 48   ...साँसारिक ज़िम्मेदारी और                  स्वास्थ्य के बिगड़ने की शुरुआत 8 × 07 = 56   ...बुढ़ापे की शुरुआत,                  रिटायरमेन्ट की तैयारी और                  वसीयत लिख डालने का समय 8 × 08 = 64   ...रिटायरमेन्ट के बाद कम से कम                 तनाव में रहने का प्रयास और                 सेहत का ख्याल रखना 8 × 09 = 72   ...रोग और स्वास्थ्य सम्बन्धी            ...

कुछ माता-पिता बड़े समझदार होते हैं

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 कुछ माता-पिता बड़े समझदार होते हैं ! वे अपने बच्चों को किसी की भी मंगनी, विवाह, लगन, शवयात्रा, उठावना, तेरहवीं (पगड़ी) जैसे अवसरों पर नहीं भेजते,  इसलिए की उनकी पढ़ाई में बाधा न हो! उनके बच्चे किसी रिश्तेदार के यहां आते-जाते नहीं, न ही किसी का घर आना-जाना पसंद करते हैं। वे हर उस काम से उन्हें से बचाते हैं . .  जहां उनका समय नष्ट होता हो !"  उनके माता-पिता उनके करियर और व्यक्तित्व निर्माण को लेकर बहुत सजग रहते हैं !  वे बच्चे सख्त पाबंदी मे जीते हैं!दिन भर पढ़ाई करते हैं,  महंगी कोचिंग जाते हैं, अनहेल्दी फूड नहीं खाते,  नींद तोड़कर सुबह जल्दी साइकिलिंग या स्विमिंग को जाते हैं, महंगी कारें, गैजेट्स और क्लोदिंग सीख जाते हैं, क्योंकि देर-सवेर उन्हें अमीरों की लाइफ स्टाइल जीना है ! फिर वे बच्चे औसत प्रतिभा के हों या होशियार, उनका अच्छा करियर बन ही जाता है, क्योंकि स्कूल से निकलते ही उन्हें बड़े शहरों के महंगे कॉलेजों में भेज दिया जाता है,जहां जैसे-तैसे उनकी पढ़ाई भी हो जाती है और प्लेसमेंट भी।  अब वह बच्चे बड़े शहरों में रहते हैं और छोटे शहरों को हिकार...