जब कभी नींद नहीं आती है तो ‘तुम’ आ जाती हों
जब कभी नींद नहीं आती है तो ‘तुम’ आ जाती हों, और जब ‘तुम’ आती हो तो फिर नींद नहीं आती। जब कभी अचानक यूँ आधी रात में नींद खुल जाती है और वापस देर तक आती नहीं तो मैं अक्सर तुम्हें सोचने लगता हूँ, पता नहीं लेकिन ऐसा प्रेम में पड़ने वाला हर लड़का शायद ऐसा करता हूँ।मनगढ़न्त ख़्वाब बुनने लगता है, ख़ुद की कहानी रचने लगता हैं..ख़यालों में ही एक फ़िल्म बनाने लगता हैं जिसमें हीरो भी वहीं है और डिरेक्टर भी वोहीं है और स्क्रिप्ट राइटर भी ख़ुद... और हीरोईन तुम..!! मेरी फ़िल्म थोड़ी अजीब है डिफ़्रेंट है अब तक रिलीज़ हुई किसी भी रोमांटिक फ़िल्म से.. इस फ़िल्म में वो सारे रोमांटिक सीन है जो अभी तक राजेश खन्ना-मुमताज़, राज कपूर-नर्गिस, धर्मेंद्र-हेमा मालिनी, अमिताभ-रेखा और शाहरुख़-काजोल पर फ़िल्माए गए है... मुझे पुरानी फ़िल्मों वाला सादा-सिम्पल प्यार पसंद है ये अर्जुन-सिद्धार्थ-वरुण धवन वाला नहीं... इसमें तुम साड़ी में हो महाराष्ट्रियन साड़ी में.. बालों में गजरा लगाए और नाक में मराठी नथ डालें। मैंने तुम्हें वनपीस ब्लैक सूट या साड़ी पहनें नहीं देखा पर उससे तो कहीं ज़्यादा अच्छी और ख...