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सद्चिंतन

आज का सद्चिंतन मित्रो ! तुम व्यर्थ में दूसरों के अनर्थकारी संदेशों को ग्रहण कर लेते हो। तुम वह सच मान बैठते हो, जो दूसरे कहते हैं। तुम स्वयं अपने आप को दुःखी करते हो और कहते हो कि दूसरे लोग हमें चैन नहीं लेने देते। तुम स्वयं ही दुःख का कारण हो, स्वयं ही अपने शत्रु हो। जो किसी ने कुछ बक दिया, तुमने मान लिया यही कारण है कि तुम उद्विग्न रहते हो। सच्चा मनुष्य एक बार उत्तम संकल्प करने के लिए यह नहीं देखता कि लोग क्या कह रहे हैं। वह अपनी धुन का पक्का होता है। सुकरात के सामने जहर का प्याला रखा गया, पर उसकी राय को कोई न बदल सका। बंदा बैरागी को भेड़ों की खाल पहना कर काले मुँह गली-गली फिराया गया, किंतु उसने दूसरों की राय न मानी। दूसरे के इशारों पर नाचना, दूसरों के सहारे पर निर्भर रहना, दूसरों की झूठी टीका-टिप्पणी से उद्विग्न होना, मानसिक दुर्बलता है। जब तक मनुष्य स्वयं अपना स्वामी नहीं बन जाता, तब तक उसका संपूर्ण विकास नहीं हो सकता। दूसरों का अनुकरण करने से मनुष्य अपनी मौलिकता से हाथ धो बैठता है। स्वयं विचार करना सीखो। दूसरों के बहकावे में न आओ। कर्त्तव्य-पथ पर बढ़ते हुए, दूसरे क्या करत...

शब्द ।

शब्द पहचान बने मेरी तो अच्छा है , चेहरे का क्या है ये तो मेरे साथ चला जायेगा ।

FATHER

पुरानी पेंट रफू करा कर पहनते जाते है, Branded नई shirt देने पे आँखे दिखाते है टूटे चश्मे से ही अख़बार पढने का लुत्फ़ उठाते है, Topaz के ब्लेड से दाढ़ी बनाते है पिताजी आज भी पैसे बचाते है …. कपड़े का पुराना थैला लिये दूर की मंडी तक जाते है, बहुत मोल-भाव करके फल-सब्जी लाते है आटा नही खरीदते, गेहूँ पिसवाते है.. पिताजी आज भी पैसे बचाते है… स्टेशन से घर पैदल ही आते है रिक्सा लेने से कतराते है सेहत का हवाला देते जाते है ... बढती महंगाई पे चिंता जताते है पिताजी आज भी पैसे बचाते है ..... पूरी गर्मी पंखे में बिताते है,......... सर्दियां आने पर रजाई में दुबक जाते है AC/Heater को सेहत का दुश्मन बताते है, लाइट खुली छूटने पे नाराज हो जाते है पिताजी आज भी पैसे बचाते है माँ के हाथ के खाने में रमते जाते है, बाहर खाने में आनाकानी मचाते है साफ़-सफाई का हवाला देते जाते है,मिर्च, मसाले और तेल से घबराते है पिताजी आज भी पैसे बचाते है… गुजरे कल के किस्से सुनाते है,........... कैसे ये सब जोड़ा गर्व से बताते है........ पुराने दिनों की याद दिलाते है, ........... बचत की अहमियत समझ...

Life n Me

This is my first blog.I  always want to write  about nature ,life, and philosophy. Nothing is permanent in this world.life is not constant. It keep. Hanging You never know which is your last breath so we should enjoy life at its best . JAI MATA DI