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Showing posts from April, 2019

सब मिथ्या है मया है

कई वर्षों तक कशमकश में उलझा रहा मैं | क्योंकि सही और गलत, पाप और पुण्य, नैतिक और अनैतिक की गुत्थी नहीं सुलझा पा रहा था | मैं नहीं समझ पा रहा था कि इनमें से सही क्या है और गलत क्या है | नैतिक होना सही है या अनैतिक होना, पापी होना सही है या पुण्यात्मा होना | आस्तिक होना सही है या नास्तिक होना | धार्मिक होना सही है या अधार्मिक होना | बरसों बाद समझ में आया कि जिससे अपना भला होता हो, जिससे स्वयं को सुख मिलता हो, जिससे अपना बैंकब्लेंस बढ़ता हो, जिससे कार, कोठी, बांग्ला मिलता हो, जिससे पद, प्रतिष्ठा व जय जयकार मिलता हो, वही सही है, बाकी सब मिथ्या है मया है | जैसे सबसे सम्मानित पद होता है आईएस, आईएएस, आइपीएस...आदि का | बहुत ही सम्मानित अधिकारी माने जाते हैं | लेकिन जब यह जानने की कोशिश करता हूँ कि ये लोग करते क्या हैं, ऐसा कौन सा महान काम करते हैं....तो पाता हूँ कि ये अपना ईमान, ज़मीर गिरवी रखकर जनता व देश को लूटने वालों की सहायता करते हैं | और यह बात हर कोई जानता भी है...फिर भी इनका सबसे अधिक सम्मान होता है | हर माँ-बाप का सपना होता है कि उनकी संतान ऐसा ही कोई अधिकारी बने और धूर्त-मक्कार, ...

सरकारी विद्यालय

मिश्रा जी के यहाँ पहला लड़का हुआ तो पत्नी ने कहा बच्चे को गाँव के सरकारी विद्यालय में शिक्षा दिलवाते है, मैं सोच रही हूँ कि  सरकारी विद्यालय में शिक्षा देकर उसे अच्छा नागरीक बनाऊंगी। मिश्रा जी ने पत्नी से कहा अच्छा नागरीक बना कर इसे भूखा मारना है क्या । मैं इसे बड़ा अफसर बनाऊंगा ताकि दुनिया में एक कामयाबी वाला इंसान बने, मिश्रा जी सरकारी बैंक में मैनेजर के पद पर थे ! पत्नी धार्मिक थी और इच्छा थी कि बेटा संसकारी बने, लेकिन मिश्रा जी नहीं माने। दूसरा लड़का हुआ पत्नी ने जिद की, मिश्रा जी इस बार भी ना माने, तीसरा लड़का हुआ पत्नी ने फिर जिद की, लेकिन मिश्रा जी एक ही रट लगाते रहे कहां से खाएगा, कैसे गुजारा करेगा , और नही माने। चौथा लड़का हुआ इस बार पत्नी की जिद के आगे मिश्रा जी हार गए , अंततः उन्होंने  सरकारी विद्यालय में शिक्षा दीक्षा दिलवाने के लिए भेज ही दिया । अब धीरे धीरे समय का चक्र घूमा, अब वो दिन आ गया जब बच्चे अपने पैरों पे मजबूती से खड़े हो गए, पहले तीनों लड़कों ने मेहनत करके सरकारी नौकरियां हासिल कर ली, पहला डॉक्टर, दूसरा बैंक मैनेजर, तीसरा एक गोवरमेंट कंपनी मेें जॉब करने...

लस्सी

शहर में एक चर्चित दूकान पर लस्सी का ऑर्डर देकर हम सब दोस्त-यार आराम से बैठकर एक दूसरे की खिंचाई और हंसी-मजाक में लगे ही थे कि एक लगभग 70-75 साल की बुजुर्ग स्त्री पैसे मांगते हुए मेरे सामने हाथ फैलाकर खड़ी हो गई।* *उनकी कमर झुकी हुई थी, चेहरे की झुर्रियों में भूख तैर रही थी। नेत्र भीतर को धंसे हुए किन्तु सजल थे। उनको देखकर मन मे न जाने क्या आया कि मैने जेब मे सिक्के निकालने के लिए डाला हुआ हाथ वापस खींचते हुए उनसे पूछ लिया I* *"दादी लस्सी पियोगी ?"* *मेरी इस बात पर दादी कम अचंभित हुईं और मेरे मित्र अधिक। क्योंकि अगर मैं उनको पैसे देता तो बस 5 या 10 रुपए ही देता लेकिन लस्सी तो 25 रुपए की एक है। इसलिए लस्सी पिलाने से मेरे गरीब हो जाने की और उस बूढ़ी दादी के द्वारा मुझे ठग कर अमीर हो जाने की संभावना बहुत अधिक बढ़ गई थी।* *दादी ने सकुचाते हुए हामी भरी और अपने पास जो मांग कर जमा किए हुए 6-7 रुपए थे वो अपने कांपते हाथों से मेरी ओर बढ़ाए। मुझे कुछ समझ नही आया तो मैने उनसे पूछा,* *"ये किस लिए?"* *"इनको मिलाकर मेरी लस्सी के पैसे चुका देना बाबूजी !"* ...

‌बदलते मौसम में प्यार के रंग।

‌बदलते मौसम में प्यार के रंग। ‌गर्मी आ गयी है, पर ये मौसम मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता । शायद इसलिए क्योंकि गर्मी की शुरूआत बसंत ऋतु के बाद होती है। बसंत में पेड़ से पुराने पत्ते अलग हो जाते हैं। लेकिन तुम मुझसे अलग होकर फिर मुझमे समाने का नाम नहीं लेती हो। मौसम की तरह खुद को तुमने भी बदल दिया है। कौन से रिवाज़ का चलन शुरू करना चाहती हो। इतना इंतज़ार तो धरती को सूरज भी नहीं करवाता। मेघ की बूंदे धरती पर एक दिन बरस ही जाती हैं। लेकिन तुम्हें तो आँसू का शौक है ना। तो इस शौक को पूरा कर लेना। लेकिन एक बात जान लो, इस बार आँसू मेरे आँखों से भी निकलेंगे। दोनों की मजबूरी यही रहेगी कि आँसू पोछने के लिए एक दूसरे के पास नहीं रहेंगे। पर इसका जिम्मेदार तुम सिर्फ मुझे मत ठहराना। पूछना अपने दिल से कभी कि ये दीवाना तुम्हें कितना प्यार करता है। हाँ, आज भी करता हूँ उतनी ही मोहब्बत। आज भी।

नव सम्वत का स्वागत है

 *हिन्दू नव वर्ष के स्वागत के लिए तैयार हो जाऐं !* 🚩 1. घर के आंगन को रंग पोत कर साफ करिये | आंगन में तुलसी का पौधा नहीं है तो अभी लगायें। 2. घर की छत या सबसे उपर के हिस्से पर एक मजबूत पोल या पाईप गडवा दीजिए, नये वर्ष पर ध्वज जो लगाना है। 3 . घर के बाहर लगाने के लिए ऊँ व स्वास्तिक के अच्छे स्टिकर इत्यादि ले आईये। 4. घर के आसपास नीम का पेड ढूंढ कर रखिए। नव वर्ष तक उसमें नई कोंपलें आ जायेंगी। नव वर्ष के दिन सुबह सुबह वे कोपलें मिश्री के साथ स्वयं भी खानी है और ओरों को भी बांटनी हैं | 5. अच्छे शुभकामना संदेश ढूंढ कर रखिये, मित्रों को जो भेजने हैं। क्या कहा? कार्ड भेजेगें । हां तो उसकी डिजाइन तैयार करने का समय आ गया है। सम्राट विक्रमादित्य, श्री राम जी कृशन जी  आदि महापुरुषों के अच्छे चित्र ढूंढना प्रारंभ कर दीजिये। शुभ-कामनाएँ पोस्ट कार्ड पर भी भेजी जा सकती हैं। अपनापन लगता है। 6. नव-वर्ष की पूर्व संध्या पर अपने गाँव, शहर, मोहल्ले, प्रतिष्ठान में सांस्कृतिक कार्यक्रम कवि सम्मेलन की योजना भी बनायी जा सकती है। 7 . नववर्ष के दिन घरों में, प्रतिष्ठानों में रोशनी करन...