सब मिथ्या है मया है

कई वर्षों तक कशमकश में उलझा रहा मैं | क्योंकि सही और गलत, पाप और पुण्य, नैतिक और अनैतिक की गुत्थी नहीं सुलझा पा रहा था | मैं नहीं समझ पा रहा था कि इनमें से सही क्या है और गलत क्या है | नैतिक होना सही है या अनैतिक होना, पापी होना सही है या पुण्यात्मा होना | आस्तिक होना सही है या नास्तिक होना | धार्मिक होना सही है या अधार्मिक होना |

बरसों बाद समझ में आया कि जिससे अपना भला होता हो, जिससे स्वयं को सुख मिलता हो, जिससे अपना बैंकब्लेंस बढ़ता हो, जिससे कार, कोठी, बांग्ला मिलता हो, जिससे पद, प्रतिष्ठा व जय जयकार मिलता हो, वही सही है, बाकी सब मिथ्या है मया है |

जैसे सबसे सम्मानित पद होता है आईएस, आईएएस, आइपीएस...आदि का | बहुत ही सम्मानित अधिकारी माने जाते हैं | लेकिन जब यह जानने की कोशिश करता हूँ कि ये लोग करते क्या हैं, ऐसा कौन सा महान काम करते हैं....तो पाता हूँ कि ये अपना ईमान, ज़मीर गिरवी रखकर जनता व देश को लूटने वालों की सहायता करते हैं | और यह बात हर कोई जानता भी है...फिर भी इनका सबसे अधिक सम्मान होता है | हर माँ-बाप का सपना होता है कि उनकी संतान ऐसा ही कोई अधिकारी बने और धूर्त-मक्कार, अपराधियों की गुलामी करके ऐश करे |

फिर सोचता था कि विधायक, साँसद, मंत्री आदि महान होते हैं, वे कोई ऐसा काम करते हैं जिससे देश व नागरिकों का हित होता है | लेकिन पता चला कि वे भी वही करते हैं जो आईएसएस, आइपीएस करते हैं, बस नेता लोग थोड़े ऊँचे लेवल पर होते हैं | दलाली तो इन्हें उन्ही की करनी होती है, जिससे देश व जनता को बचाना चाहिए | जनता भी यह बात अच्छी तरह से जानती है...लेकिन परम्परा है इसलिए निभाये चली जा रही है |

फिर यह बात समझ में आयी कि कमजोर होना, निर्धन होना ही सबसे बड़ा पाप है और सबसे अधिक अनैतिक भी | यदि अप कमजोर हैं, निर्धन हैं, तो जिन धाराओं पर धनी व ताकतवर लोग बेशर्मी से बाहर घूमते रहते हैं, उन्ही धाराओं पर जेल में सडा दिए जाओगे | और जब तक स्वयं को निर्दोष साबित करोगे, तब तक उम्र गुजर चुकी होगी |

यह दुनिया बहुत ही अलग है....यहाँ धार्मिकों को धर्म का ज्ञान नहीं, अधार्मिक धर्मों के ठेकेदार बने बैठे हैं | जनता और देश को लूटने वाले चौकीदार बने बैठे हैं.....समाज में द्वेष व घृणा फैलाने वाले साधू-संत बने बैठे हैं |

जितना इस गुत्थी को सुलझाना चाहता हूँ, उतना ही उलझता चला जाता हूँ मैं |


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