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Showing posts from October, 2020

लड़के

 कुछ लड़के बड़े अच्छे लगते हैं जब मां से पूछते हैं , "आम का अचार है क्या ?" कुछ लड़के जब कभी किसी लड़की को  कनखियों से देखने पर पकड़े जाते हैं, तो शर्माकर, सकपकाकर , पकड़ने वाले से ही  पलटकर पूछते हैं "क्या हुआ ? कुछ भी तो नहीं !" कसम से , अच्छे लगते हैं ! अच्छे लगते हैं वे सारे लड़के, जो मंगलवार और शनिवार  मंदिर में प्रसाद चढ़ा, मन ही मन सबकी राजी-खुशी  मांगा करते हैं , और मीठी बूंदी और पेड़े घर -मुहल्ले में बिना नागा बाँटा करते हैं ! अच्छे लगते हैं वे सारे लड़के  जो चाकलेट, चिप्स के पैकेट खोलकर कर देते हैं सबसे पहले  अपनी माँ और बहन के आगे, और कहते हैं , "लो, आपका फेवरेट है न ये वाला !" कुछ लड़के सचमुच अच्छे लगते हैं जब, ऐमी.वाई.बंटाई के गानों से बेखबर , सुनते हैं किशोर कुमार और मोहम्मद रफी को, और गुनगुनाते हैं, कहीं दूर जब दिन ढल जाए ! वे सारे लड़के सच में बहुत अच्छे लगते हैं, जो अक्सर  गोलगप्पे वाले से कहते हैं , "भैया मुझे अबकी मीठा पानी वाला देना !" अच्छे लगते हैं ऐसे सारे लड़के , क्योंकि इनके व्यक्तित्व में कुछ न कुछ तो  ऐसा जरूर होता ...

मेरे बेटे

  कभी इतने ऊँचे मत होना कि कंधे पर सिर रखकर कोई रोना चाहे तो उसे लगानी पड़े सीढ़ियाँ . न कभी इतने बुद्धिजीवी कि मेहनतकशों के रंग से अलग हो जाए तुम्हारा रंग . इतने इज़्ज़तदार भी न होना कि मुँह के बल गिरो तो आँखें चुराकर उठो . न इतने तमीज़दार ही कि बड़े लोगों की नाफ़रमानी न कर सको कभी . इतने सभ्य भी मत होना कि छत पर प्रेम करते कबूतरों का जोड़ा तुम्हें अश्लील लगने लगे और कंकड़ मारकर उड़ा दो उन्हें बच्चों के सामने से . न इतने सुथरे ही होना कि मेहनत से कमाए गए कॉलर का मैल छुपाते फिरो महफ़िल में . इतने धार्मिक मत होना कि ईश्वर को बचाने के लिए इंसान पर उठ जाए तुम्हारा हाथ . न कभी इतने देशभक्त कि किसी घायल को उठाने को झंडा ज़मीन पर न रख सको . कभी इतने स्थायी मत होना कि कोई लड़खड़ाए तो अनजाने ही फूट पड़े हँसी . और न कभी इतने भरे-पूरे कि किसी का प्रेम में बिलखना और भूख से मर जाना लगने लगे गल्प। .