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Showing posts from June, 2021

पिता_पुत्र की जोड़ी

  अगर कभी गौर किया हो तो पाएंगे पिता-पुत्र की जोड़ी बड़े कमाल की जोड़ी होती है | दुनिया के किसी भी सम्बन्ध में, अगर सबसे कम बोल-चाल है, तो वो है पिता-पुत्र की जोड़ी। एक समय तक दोनों अंजान होते हैं,  एक दूसरे के बढ़ते शरीरों की उम्र से, फिर धीरे से अहसास होता है, हमेशा के लिए बिछड़ने का । जब लड़का, अपनी जवानी पार कर,  अगले पड़ाव पर चढ़ता है, तो यहाँ,  इशारों से बाते होने लगती हैं,  या फिर, इनके बीच मध्यस्थ का दायित्व निभाती है माँ । पिता अक्सर पुत्र की माँ से कहता है,  जा, "उससे कह देना" और, पुत्र अक्सर अपनी माँ से कहता है, "पापा से पूछ लो ना" इन्हीं दोनों धुरियों के बीच,  घूमती रहती है माँ ।  जब एक,  कहीं होता है,  तो दूसरा,  वहां नहीं होने की,  कोशिश करता है, शायद,  पिता-पुत्र नज़दीकी से डरते हैं । जबकि,  वो डर नज़दीकी का नहीं है,  डर है,  उसके बाद बिछड़ने का ।  मैंने तो हमेशा देखा है भारतीय पिता ने शायद ही किसी बेटे को,  कभी कहा हो,  कि बेटा,  मैं तुमसे बेइंतहा प्यार करता हूँ । पिता के अनंत रौद्र ...

बुढ़ापा

   बुढ़ापा सबको आना है  मुझे आना है आपको आना है  बुढ़ापा जीवन का अंतिम पड़ाव है  यहां से पाप-पुण्य का पड़ाव है  आप बुजुर्गो की सेवा करते हो  आप स्वर्ग में जाते हो  आप बुजुर्गो की सेवा नहीं करते  आप नरक में जाते हो  यहीं से पाप पुण्य का पड़ाव है  बुढ़ापा जीवन बचपन से मिलता जुलता है  अपनों से रूठना बातों-बातों में चिढ़ाना  गुस्सा करना हठी होने लड़ना और झगड़ना ये बुढ़ापा का स्वभाव है जो हम सब में आता है  आज कई पीढ़ी समझते हैं  हमें बुढ़ापा नहीं आयेगा  हम अमर ही रहेंगे यूं ही रहेगें  हम कभी उनकी तरह नहीं बनेंगे  ऐसे में वे अपने बुजुर्गों को  दर किनार कर रहे हैं और वे  एकांत वासी बनने में मजबूर हो रहे है  आईये उन्हें समझें और उनके साथ रहें  उनका ही दिया आज सब कुछ हमारे लिए हैं  आईये उनको महसूस होनें ना दें वे बुजुर्ग है  उनके दोस्त बन कर उनके अनुभव को सीखें  आईये उन्हें समझें और उनके साथ रहे