अब मुझे भी जाना है

 मृत सागर की तरह

अब मुझे भी हो जाना है,,


जिस तरह उसकी गहराई में,,

उतर न पाता कोई

लहरे उसे तैरा देती हैं,

डूबने नहीं देती,,

और बाहर की ओर

धकेल देतीं हैं,,,

उसी तरह मुझे

समाहित नहीं करना

कुछ भी भीतर मेरे,,

मुझे भी उदासीन

हो जाना है ..


जिस तरह उसमें घनत्व

की अधिकता है,,

उसी तरह मुझे भी

बुन लेना है अपनी

अन्तरात्मा को सघनता से

कि कोई न पहुच पाए वहां तक,,

न कोई आघात,न कोई औषधि..


जिस तरह उसमें लवणता 

सबसे ज्यादा है,,

उसी तरह मुझे भी 

मिठास छोड़कर खारा हो जाना है..।



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