तरूणाई जाने के बाद
अंजलि की दोपहर की मीठी सी झपकी फोन की घण्टी से टूट गई । अलसाते हुए उसने देखा तो शेखर ( उसका पति ) की कॉल थी । " हाँजी " " हाँ …..हैलो अंजलि " " जी बोलिए " " सुनो , तुम कपड़े पैक कर लो ,हमें कल सुबह निकलना है " शेखर बोले " निकलना है , पर कहाँ ? " " अरे यार ! वो कम्पनी वालों ने मुझे घूमने का पैकेज दिया है । " " हाँ तो आप जाइये न , जैसे हमेशा जाते हैं अपने कुलीग्स के साथ ….." " अरे नहीं यार …उसमें पति पत्नी दोनों का साथ जाना ज़रूरी है , तभी वो टूर मिलेगा वरना कैंसिल । हमें शिमला जाना है । " शेखर का उत्तर आया " शिमला ……" " हाँ … शिमला , चलो तुम तैयारी करो , मैं रखता हूँ …." अंजलि ने कुछ कहने के लिए मुँह खोला ही था कि दूसरी ओर से फोन कट गया । पर अंजलि के कानों में शेखर के वो शब्द गूँज रहे थे , शिमला ….शिमला बचपन से तमन्ना थी उसकी शिमला घूमने की , फिल्मों में शिमला की हरी भरी वादियों को देखती तो उसका वहाँ जाने का मन करता । जब विवाह तय हुआ तो उसके मन में भावी पति संग शिमला की वादियों में ...