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Showing posts from April, 2022

तरूणाई जाने के बाद

  अंजलि की दोपहर की मीठी सी झपकी फोन की घण्टी से टूट गई । अलसाते हुए उसने देखा तो शेखर ( उसका पति ) की कॉल थी ।  " हाँजी " " हाँ …..हैलो अंजलि " " जी बोलिए " " सुनो , तुम कपड़े पैक कर लो ,हमें कल सुबह निकलना है " शेखर बोले " निकलना है , पर कहाँ ? " " अरे यार ! वो कम्पनी वालों ने मुझे घूमने का पैकेज दिया है । " " हाँ तो आप जाइये न , जैसे हमेशा जाते हैं अपने कुलीग्स के साथ ….." " अरे नहीं यार …उसमें पति पत्नी दोनों का साथ जाना ज़रूरी है , तभी वो टूर मिलेगा वरना कैंसिल । हमें शिमला जाना है । " शेखर का उत्तर आया " शिमला ……" " हाँ … शिमला , चलो तुम तैयारी करो , मैं रखता हूँ …." अंजलि ने कुछ कहने के लिए मुँह खोला ही था कि दूसरी ओर से फोन कट गया ।  पर अंजलि के कानों में शेखर के वो शब्द गूँज रहे थे , शिमला ….शिमला  बचपन से तमन्ना थी उसकी शिमला घूमने की , फिल्मों में शिमला की हरी भरी वादियों को देखती तो उसका वहाँ जाने का मन करता । जब विवाह तय हुआ तो उसके मन में भावी पति संग शिमला की वादियों में ...

प्रतिभा

 जंगल के राजा शेर ने ऐलान कर दिया कि अब आज के बाद कोई अनपढ़ न रहेगा। हर पशु को अपना बच्चा स्कूल भेजना होगा। राजा साहब का स्कूल पढ़ा-लिखाकर सबको सर्टिफिकेट बँटेगा।        सब बच्चे चले स्कूल। हाथी का बच्चा भी आया, शेर का भी, बंदर भी आया और मछली भी, खरगोश भी आया तो कछुआ भी, ऊँट भी और जिराफ भी। पहली बार यूनिट टेस्ट एग्जाम हुआ तो हाथी का बच्चा फेल।  "किस Subject में फेल हो गया जी?"  "पेड़ पर चढ़ने में फेल हो गया, हाथी का बच्चा।"  "अब का करें?"  "ट्यूशन दिलवाओ, कोचिंग में भेजो।"        अब हाथी की जिन्दगी का एक ही मक़सद था कि हमारे बच्चे को पेड़ पर चढ़ने में Top कराना है।      किसी तरह साल बीता। फाइनल रिजल्ट आया तो हाथी, ऊँट, जिराफ सब फेल हो गए। बंदर की औलाद प्रथम आयी।  प्रिंसिपल ने स्टेज पर बुलाकर मैडल दिया। बंदर ने उछल-उछल के कलाबाजियाँ दिखाकर गुलाटियाँ मार कर अपनी खुशी का इजहार किया।  उधर अपमानित महसूस कर रहे हाथी, ऊँट और जिराफ ने अपने-अपने बच्चों को कूट दिये । नालायकों, इतने महँगे स्कूल में पढ़ाते हैं तुमको |...

ONE BEDROOM FLAT...

A Bitter Reality As the dream of most parents I had acquired a degree in Engineering and joined a company based in USA, the land of braves and opportunity. When I arrived in the USA, it was as if a dream had come true. Here at last I was in the place where I want to be. I decided I would be staying in this country for about Five years in which time I would have earned enough money to settle down in India. My father was a government employee and after his retirement, the only asset he could acquire was a decent one bedroom flat. I wanted to do something more than him. I started feeling homesick and lonely as the time passed. I used to call home and speak to my parents every week using cheap international phone cards. Two years passed, two years of Burgers at McDonald's and pizzas and discos and 2 years watching the foreign exchange rate getting happy whenever the Rupee value went down. Finally I decided to get married. Told my parents that I have only 10 days of holidays and everyth...

पति पत्नी का एक खूबसूरत संवाद

  मैंने एक दिन अपनी पत्नी से पूछा ~ क्या तुम्हें बुरा नहीं लगता, मैं बार-बार तुमको बोल देता हूँ,  डाँट देता हूँ , फिर भी तुम पति भक्ति में लगी रहती हो, जबकि मैं कभी पत्नी भक्त बनने का प्रयास नहीं करता? मैं वेद का विद्यार्थी और मेरी पत्नी विज्ञान की, परन्तु उसकी आध्यात्मिक शक्तियाँ मुझसे कई गुना ज्यादा हैं, क्योकि मैं केवल पढता हूँ, और वो जीवन में उसका पालन करती है. मेरे प्रश्न पर, जरा वो हँसी, और गिलास में पानी देते हुए बोली ~ ये बताइए, एक पुत्र यदि माता की भक्ति करता है, तो उसे मातृ भक्त कहा जाता है, परन्तु माता यदि पुत्र की कितनी भी सेवा करे, उसे पुत्र भक्त तो नहीं कहा जा सकता न ? मैं सोच रहा था, आज पुनः ये मुझे निरुत्तर करेगी. मैंने प्रश्न किया ~ ये बताओ जब जीवन का प्रारम्भ हुआ, तो पुरुष और स्त्री समान थे, फिर पुरुष बड़ा कैसे हो गया, जबकि स्त्री तो शक्ति का स्वरूप होती है ? मुस्काते हुए उसने कहा ~ आपको थोड़ी विज्ञान भी पढ़नी चाहिए थी,मैं झेंप गया. उसने कहना प्रारम्भ किया ~ दुनिया मात्र दो वस्तु से निर्मित है ... ऊर्जा और पदार्थ,  पुरुष > ऊर्जा का प्रतीक है, और स्त्री ...

रिश्तों के महत्व को समझें और उनको सहेज कर रखें।

 घर की नई नवेली इकलौती बहू एक प्राइवेट बैंक में बड़े ओहदे पर थी । उसकी सास तकरीबन एक साल पहले ही गुज़र चुकी थी । घर में बुज़ुर्ग ससुर औऱ उसके पति के अलावे कोई न था । पति का अपना कारोबार था । पिछले कुछ दिनों से बहू के साथ एक विचित्र बात होती ।बहू जब जल्दी जल्दी घर का काम निपटा कर ऑफिस के लिए निकलती ठीक उसी वक़्त ससुर उसे आवाज़ देते औऱ कहते बहू ,मेरा चश्मा साफ कर मुझें देती जा। लगातार ऑफिस के लिए निकलते समय बहू के साथ यही होता । काम के दबाव औऱ देर होने के कारण क़भी कभी बहू मन ही मन झल्ला जाती लेकिन फ़िरभी अपने ससुर को कुछ बोल नहीं पाती । जब बहू अपने ससुर के इस आदत से पूरी तरह ऊब गई तो उसने पूरे माजरे को अपने पति के साथ साझा किया ।पति को भी अपने पिता के इस व्यवहार पर बड़ा ताज्जुब हुआ लेकिन उसने अपने पिता से कुछ नहीं कहा। पति ने अपनी पत्नी को सलाह दी कि तुम सुबह उठते के साथ ही पिताजी का चश्मा साफ करके उनके कमरे में रख दिया करो ,फिर ये झमेला समाप्त हो जाएगा । अगले दिन बहू ने ऐसा ही किया औऱ अपने ससुर के चश्मे को सुबह ही अच्छी तरह साफ करके उनके कमरे में रख आई।लेकिन फ़िरभी उस दिन वही घटना पुनः हुई ...

कविताएं

 प्रशस्तिपत्रों के लिए  नहीं लिखी जाती कविताएं, न ही फूलमालाएं पहनकर  भव्य मंचों के माईकों से निकल  तालियाँ बटोरने के लिए. न तो बैस्टसैलर किताब  होने के लिए और  और न ही किसी सौ करोड़ कल्ब की  फिल्म का गीत बन  इयरफोन के लूप में बजने के लिए लिखी जाती है.  कविताएं समाज की  अंतिम पंक्ति में हारकर मुंह छिपाए खड़े उस जीर्ण-क्षीण शोषित के कंपकपाते होठों की  बुदबुदाहट में ठहर  नारा बनने की  चाह में लिखी जाती हैं, वह नारा  जो उसे पुन: साहस प्रदान करेगा!  वह उठेगा वह लड़ेगा वह जीतेगा.  निन्यानवें प्रतिशत अभागी कविताएं  नारा नहीं बन पाती और प्रशस्तिपत्र , तालियां, फूलमालाएं बेस्टसेलर का खिताब पाती हैं. नारा बनी कविताएं ही कालजयी कहलाती हैं! 

कितना सुंदर होता है, UPSC में फेल हो जाना !

 UPSC दिए, क्लियर नहीं हुआ. फिर से दिए, फिर नहीं हुआ. लेकिन रोए नहीं कतई. कोरा पर एक सवाल आया. कि IAS अफसर बनने का सफ़र कितना खुशनुमा होता है? उसका जवाब दिया अकंद ने. लेकिन IAS बनने नहीं, न बनने के बारे में. ये एक खुला ख़त है, उन सभी के लिए जो UPSC के लिए पूरी मेहनत करते हैं. बार-बार ट्राय कर भी फेल हो जाते हैं. बल्कि सिर्फ उनके लिए ही नहीं, उन सभी के लिए जो किसी न किसी एग्जाम में फेल हुए हैं. अकंद ने ये पोस्ट कोरा पर अंग्रेजी में लिखी थी. मुझे अपना छोटा सा इतिहास देने की इजाजत दें. सिविल सर्विसेज 2013- इंटरव्यू फेल सिविल सर्विसेज 2015- मेन्स फेल सिविल सर्विसेज 2015- प्रीलिम्स फेल RBI मैनेजर पोस्ट 2015- इंटरव्यू फेल SSC CGL 2015- टायर 2 फेल हर साल, मैं किसी न किसी एग्जाम के फाइनल राउंड तक पहुंचता हूं और फिर बाहर हो जाता हूं. फाइनल लिस्ट में हमेशा कुछ नंबरों से रह गया, हर बार. इतना करीब. फिर भी इतना दूर. तीन साल की पढ़ाई. क्या मैंने अपना समय बर्बाद किया? कैसा रहा ये सफ़र? क्या मैं खुश हूं? मेरी एक सिंपल सी जिंदगी में ऐसे बहुत से सवाल हैं. ख़ुशी असल में होती क्या है? अलग-अलग समय पर इ...