ऊँगली
आज किचन में काम करते हुए, ऊँगली कट गयी,
पतिदेव वंही थे सो देख लिया,
बोले ध्यान रखना चाहिये ऐसे कैसे काम करती हो, सासु माँ बोली, कि ध्यान कहीं ओर होगा ओर आँखे कहीं ओर,
ससुर जी तो बस मुँह सिकोड़ कर रह गये ? ओर बात आयी गयी हो गयी,
खुद ही enticeptic लगाया फिर घर के सारे काम किये, दवाई लगाते हुए ध्यान आया,
कि यदि यही मायके में हुआ होता तो,
मेरी माँ दौड़ते हुए आती ओर सबसे पहले हाथ पकड कर कहती, हाय राम कितना खुन निकल रहा है,
ये लड़की कभी सुनती नही है,
करते हुए चोट को हल्दी लगाती, पापा तो मम्मी को ही डांट लगाते कहते,
इतना ही नही, भुआ मामा -नानी दादी -
अब शुरु हुआ हिदायतों का सिलसिला, पता नहीं ससुराल मे अकेले कैसे सब सम्भालेगी, अभी छोटी है, सीख जाएगी अभी से kitchen सौंप दिया है उसे, सबको फोन करके खबर दी जाती है कि गुड्डो का हाथ कट गया, सब खबर लेने घर आते है, कि हाय फूल सी बच्ची कुल मिलाकर चोट लगने का असली मज़ा भी मायके में ही आता है, जँहा आपकी परवाह कि जाती है, आपकी चोट को पारिवारिक चोट घोषित करके, प्यार ओर अपनेपन का ऐसा मरहम लगाया जाता है, कि चोट लगवाने का बार बार दिल करता है,
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