कठपुतली

  


"भाभी! कहां हो? जल्दी से तैयार हो जाओ,मेरी सब फ्रेंड्स आपसे मिलने आ रही हैं,आपकी स्पेशल पाव भाजी भी बना देना।और हां वो ऑरेंज सूट बहुत अच्छा लगता है,वही पहनना प्लीज।"


छोटी ननद का फरमान सुनते ही ऋतु ने फटाफट मूड और मुखौटा दोनों ही बदल लिए।


आज ससुरजी के मॉर्निंग वॉक के संगी साथी आएंगे,गर्मागर्म कचौड़ी के साथ कोई ढंग की साड़ी पहनना है उसे।

एक और मुखौटा..!


मांजी के गुरुदेव वृंदावन जाने से पहले रास्ते में कुछ देर घर पर रुकेंगे,सभी को आशीर्वाद देने । खाने में मेवे की खीर के साथ फलाहारी सब्जी पूड़ी खायेंगे।

गुरुजी का मान रखने के लिए कोई अच्छी कॉटन की साड़ी पूरी बांहों के ब्लाउज के साथ पहनने का आदेश मिला है।

चुप रहने की ताकीद भी।सभी चीजों के साथ आदर्श नई बहु का मुखौटा भी ओढ़ लिया।


पतिदेव के दोस्त के घर जाना है,कॉकटेल पार्टी में,पाश्चात्य परिधान के ऊपर साड़ी लपेट घर से निकली।

अल्ट्रा मॉडर्न बीवी का मुखौटा रास्ते में चढ़ा लेगी।


शादी के बाद पहली बार छोटा भाई उससे मिलने ससुराल आया,कुछ समझ ही नहीं पा रही है वो,क्या करे,क्या कहे?

भाई भी असमंजस में है,मौका मिलते ही पूछा,


" दीदी क्या हो गया,आप कितना बदल गईं,मेरी पहले वाली दीदी नहीं हो आप,इतनी देर हो गई,आपकी हंसी ही नहीं सुनी,बिना हंसे कैसे रह लेती हो आप ?"


"भाई! इन मुखौटों का बोझ सहन नहीं होता,हंसी खुशी किसी बात का अहसास नहीं होता अब मुझे।"


"तो उतार फेंकिए सारे मुखौटे..आप जैसी हैं वैसी ही रहिए,अपने मूल स्वभाव और सामान्य रूप में।

कठपुतली बनने की कोई ज़रूरत नहीं।"


विश्वास नहीं हो रहा ऋतु को,छोटा भाई इतना जिम्मेदार कबसे हो गया?


आज सारे मुखौटे उतार कर रख दिए हैं,सब कुछ कितना हल्का और आसान लग रहा है ना।



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