Posts

Showing posts from May, 2023

भ्रम

Image
 एक बार एक टीवी इंटरव्यू में अभिनेता धर्मेंद्र से पूछा गया कि आपको क़भी भी फिल्म अमर अकबर एंथनी छोड़ने का अफसोस होता है क्योंकि वो एक सुपर डुपर हिट फिल्म बन गई थी ?  धर्मेंद्र ने जवाब में मुस्कुराते हुए कहा कि अगर मैंने वो फ़िल्म कर भी ली होती तो अपने जीवन में और क्या बन गया होता, जो अभी नहीं हूं ! ऐसा ही सवाल एक्टर पीयूष मिश्रा से एक इंटरव्यू में पूछा गया कि सुना है सूरज बड़जात्या आपको मैंने प्यार किया में हीरो लेना चाहते थे, आपने मना कर दिया और रोल सलमान खान को मिल गया और वो कहां से कहां पहुंच गए, कभी आपको इसका अफसोस होता है?   पीयूष का जवाब बहुत शानदार था ...उन्होंने कहा तब कर लिया होता तो शायद अब जो कर रहा हूं, वो ना कर पाता, इसलिए अभी ज्यादा खुश हूं.  दोनों जवाब में एक बात कॉमन है कि हर काम, हर खिताब, हर पुरस्कार आप नहीं ले सकते. सब आप ही समेट लें इसका लालच मत कीजिए । जीवन में सभी को किसी न किसी बात का दुख रहेगा ही क्योंकि....जिंदगी की कोई अंतिम मंजिल नहीं होती... इसलिए किसी आखिरी जीत या अंतिम लक्ष्य के लिए जीना भ्रम है....। जीवन एक खेल है, बस फर्क है कि इसमे...

गौरैया

“इतनी दूर जाना ज़रूरी है क्या? और फिर कितना तो खर्चा हो जाएगा। पापा पे इतना बोझ डालना ठीक नहीं है। पहले ही पढ़ाई के खर्चे पे रिश्तेदार सुना देते हैं कि इतने में तो शादी हो जाती।”  “तो ये सब तो ऐप्लिकेशन डालने के पहले सोचना था ना? और स्कॉलरशिप मिल तो रही है। खर्चा तो पहले से कम ही है। और इतनी चिंता है, तो वहाँ रोज़मर्रा के खर्चे कम कर लेना।” शांत भाव से कपड़े समेटती माँ ने कहा।  “वो तो खैर मैं कुछ नौकरी भी कर लूँगी। लेकिन इतना दूर!! सब लोग क्या बोलेंगे।” मैं अभी भी आशंकित थी।  “डर लग रहा है?” माँ अब मुस्कुरा रही थी।  “मेरी छोड़ो! तुम्हें नहीं लग रहा? इतनी दूर जा के बिगड़ गई मैं तो? और फिर सारी माएँ तो बच्चों को पास रखना चाहती हैं। सुना नहीं था मिश्रा आंटी क्या कह रही थीं चौहान आंटी के बारे में? कि एक भी बच्चा पास नहीं है! क्या मतलब ऐसी औलाद का!”  अब तक माँ के कपड़े भी समेटे जा चुके थे, और चेहरे पे आई सलवटें भी। मेरे सामने बैठ के बहुत धीर गम्भीर शब्दों में माँ ने कहा, “ध्यान से सुनो! सौ लोगों और हज़ार परिस्थितियों पे शक करने से आसान है एक इंसान पे यक़ीन करना। और म...