भ्रम
एक बार एक टीवी इंटरव्यू में अभिनेता धर्मेंद्र से पूछा गया कि आपको क़भी भी फिल्म अमर अकबर एंथनी छोड़ने का अफसोस होता है क्योंकि वो एक सुपर डुपर हिट फिल्म बन गई थी ? धर्मेंद्र ने जवाब में मुस्कुराते हुए कहा कि अगर मैंने वो फ़िल्म कर भी ली होती तो अपने जीवन में और क्या बन गया होता, जो अभी नहीं हूं ! ऐसा ही सवाल एक्टर पीयूष मिश्रा से एक इंटरव्यू में पूछा गया कि सुना है सूरज बड़जात्या आपको मैंने प्यार किया में हीरो लेना चाहते थे, आपने मना कर दिया और रोल सलमान खान को मिल गया और वो कहां से कहां पहुंच गए, कभी आपको इसका अफसोस होता है? पीयूष का जवाब बहुत शानदार था ...उन्होंने कहा तब कर लिया होता तो शायद अब जो कर रहा हूं, वो ना कर पाता, इसलिए अभी ज्यादा खुश हूं. दोनों जवाब में एक बात कॉमन है कि हर काम, हर खिताब, हर पुरस्कार आप नहीं ले सकते. सब आप ही समेट लें इसका लालच मत कीजिए । जीवन में सभी को किसी न किसी बात का दुख रहेगा ही क्योंकि....जिंदगी की कोई अंतिम मंजिल नहीं होती... इसलिए किसी आखिरी जीत या अंतिम लक्ष्य के लिए जीना भ्रम है....। जीवन एक खेल है, बस फर्क है कि इसमे...