जोड़ने वाले लोग

 वे जोड़ने वाले लोग



थे

हर चीज जोड़ कर रखते थे

चश्मा टूटा तब कतरन बांधी

ढीली अंगूठी पर लपेटा धागा 

फटे कुर्ते पर पैबंद 

चप्पल पर कील ढोंक रस्सी की गाँठ खींच ली।


बड़े चतुर, मेहनती लोग थे

पतीले के हैंडल पर लकड़ी जोड़ लेते

चाकू की धार खुद तेज करते

उनके घर की कुंडी कसी रही

लकड़ी एक कुल्हाड़ी से दो फांक कर लेते।


वे संभाल कर रखते थे

उनके यहाँ मैंने बेकार चीजें नहीं देखी

पुराने कपड़ों के गुदड़े बने

परात पर पतावे लगा कर संभाला गया

कहीं घिस न जाए

फूटी टोकनी पर तली लगवा ली

बाल्टी पर पैंदी

मटके की दरार पर सीमेंट लेप ली

साल भर का ईंधन समेटते थे

पूरे साल का अनाज।


वे मेरा मेरा नहीं

आपणी बेटी, आपणी बहू, 

आपणा भाई, आपणा गाम पुकारते थे

सब साझा था

पंचायती बर्तनों में जीमते- जूठते

ऊँची परस( धर्मशाला) वाले लोग थे।


एक दिन जुड़ी जुड़ाई सब चीजें टूट गई 

कैसे, कब पता नहीं 

हाँ! इतना जानती हूँ

अब कोई जोड़ने वाला भी नहीं रहा

यहाँ टूटी चीजें बस फेंक दी जाती हैं।

          स

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