देश जरूर काम आया
मैं आने वाली
नस्लों के लिए
ये साफ लिख रहा हूँ
कि
जरूरत के दौर में
सरकार काम
नहीं आयी किसी के-
पर
देश जरूर काम आया-
हर गालों के आँसू
अजनबी कांधों पर गिरे-
कटे हुए जंगल में
हम सब
एक दूसरे की छाँव में खड़े हुए।
बुझते वक़्त में
हर घर ने दूसरे घर
के लिए चूल्हा जलाया।
मेरे बच्चों-
सरकार नहीं आयी काम-
देश जरूर काम आया।।
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