कल और आज
कल मैं, "मैं" था ,
आज भी मैं ,मैं ही हूँ,
लेकिन कल और आज में ,
आकाश ,जमीन का अंतर आ गया ।
कल तक मैं सेवारत था ,
आज मैं सेवानिवृत हो गया ।
कल तक जिस कुर्सी पर बैठ कर
साधिकार शासन करता था ,
आज , उसी कुर्सी के लिए,
मैं ,अनधिकृत हो गया ।
कल तक मैं आदरणीय ,सम्मानीय,
पूज्य , माननीय आदि आदरसूचक ,
शब्दो से संबोधित किया जाता था ,
आज वही सामान्य हो गया ।
मैं जबतक सेवारत था ,
दिन के सामान प्रकाशित ,
ज्योतित और आलोकित था ,
आज मेरा एक तरह से ,
अवसान हो गया ।
प्रज्ज्वलित स्वरूप ,
एकाएक मंद हो गया ।
मैं सही अर्थ में ,मैं ,
नही रह गया और वो हो गया ।
इसी प्रकार तन में ,
जबतक सांसें रहती हैं ,
मैं नाम से पुकारा जाता हूँ ,
और सांसें बंद होने के बाद ,
मैं मैं नही रह जाता हूँ ,
लाश या बॉडी हो जाता हूँ ।
त्याज्य , अस्पर्शीय जो जाता हूँ ।
या तो जला दिया जाता हूँ ,
या मिट्टी के नीचे दबा दिया जाता हूँ ।
स्वर्गीय ,दिवंगत आदि हो जाता हूँ ।
लगभग यही स्थिति ,
पदस्थापित और स्थान्तरित
पदाधिकारियों की होती है ।
जबतक जिलाधिकारी ,एस पी ,
अपने पदों पर काबिज रहते हैं
पूरा जिला थर्राता है ,
जैसे ही वे स्थान्तरित होते हैं,
प्रभाव हीन हो जाते है ।
उनका मैं भी विलुप्त हो जाता है ।
तभी कल और आज का
महत्व समझ मे आता है ।
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