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Showing posts from May, 2021

मिडल क्लास लौंडे

 मिडल क्लास लौंडे बेचारे... पढ़ना कुछ और चाहते हैं , पढ़ाया कुछ और जाता है , बन कुछ और जाते हैं ! पसन्द किसी और को करते हैं, प्यार किसी और का मिलता है शादी किसी और से हो जाती है ! चाय बना लेते हैं, कर्ज़ लेने और देने में जरा सी भी देरी नही करते ! रिश्तेदारों को शहर घुमाने की जिम्मेदारी यही निभाते हैं ! 4जी फोन लेने में इन्हें साल भर लगता है ! गैस भरवाने की जिम्मेदारी , सुबह दूध और शाम की सब्जी लाने जैसा कठिन और दर्दनाक काम भी यही करते हैं ! खुद की प्रेमिका की शादी में 'नागिन डांस' करने का गौरव केवलः इन्हें ही प्राप्त है ! आइसक्रीम की टेस्ट से इन्हें शादी में हुए खर्चों का अंदाजा लग जाता है ! लुसेंट इनकी जिंदगी में उस गर्लफ्रेंड की तरह होती है जो साथ तो रहती है लेकिन समझ कभी नही आती ! रीजनिंग के प्रश्न चुटकी में हल कर देने वाले ये मिडल क्लास लौंडे खुद की जिंदगी की समस्याओं में उलझे रह जाते हैं ! घर और अपनी 'जान' से किसी लायक बनने का वादा करके निकले ये मिडल क्लास लौंडे जब तक लायक हो के घर लौटते हैं तब तक उनकी जान 'दो चार जानो' की 'जननी' बन चुकी होती है ! पापा...

अपने होते हुए फरेबों की चिंता न करो दोस्त ।।

 ।। ए मेरे दोस्त ।। किसी को ज्यादा दिल से न लगाओ दोस्त । किसी को हद से ज्यादा पसंद न करो दोस्त ।। अपने ही पीठ पीछे खंजर खोंपते हैं यहां । किसी पर आंख बंद कर भरोसा न करो दोस्त ।। बीच रास्ते में हाथ छोड़ तमाशा देखते हैं । सभी को अपना मान खुशी न मनाओ दोस्त ।। चीनी को चींटी जैसे चिपक जाते हैं लोग । जानबूझकर खंडहर में न गिर जाओ दोस्त ।। अपने स्वार्थ के लिए हाथ बढ़ाते हैं लोग । सोच समझकर लोगों से हाथ मिलाओ दोस्त ।। अपने आप पर विश्वास रखना सदा ही यहां । जो छोड़ चले जाते हैं उन्हें मत पुकारो दोस्त ।। जो तेरे अपने हैं सदा साथ निभाते हैं यहां । अपने होते हुए फरेबों की चिंता न करो दोस्त ।।  

याद आ रहे है वो रिश्तें

 मेरी दुनिया टिकी है जिन स्तम्भों पर   याद आ रहे है वो रिश्तें       जो वक्त निकाल ,     लम्बा सफर तय कर       आते थे मिलने /      आँगन से विदा बखत        पलट पलट कर        हाथ हिलाते थे  ओझल होने तक / इंतज़ार करते थे शिद्दत से याद आ रहे है वो रिश्तें ..... ज़ेहन में कौंध रहे है अज़ीज चेहरे जो देर तक गले लग   नम कर देते थे सारे जज़्बात / जो करने को हैरान सुनाते थे  मनगढ़ंत किस्से ../ बनाने महफ़िल की लज्ज़त सुनाते थे लतीफ़े ढेरों  और कर देते थे नीम दोपहरिया गुलकंद / खुशी में दिल से होते थे शामिल  मुश्किल में बहलाते थे तसल्लियाँ दे वो स्तंभ याद आते है.... ये दुनिया मजबूत खगोलीय नियमों  पर नही टिकी , ना ही चक्कर लगाती है ग्रहों के जादुई खिंचाव से दुनिया तो टिकी है / उन लोगो से जिन्हें भरोसा है कि कुछ लोगों को उनसे बेहद प्यार है / फेरे लगाती है उन रिश्तों के जो उजालों को सराहते है / दुनिया टिकी उन लोगों के भरोसे जो नुकसान उठा कर भी भरोसा नही तोड़ते / म...

दुनिया थोड़ी सुंदर लगती रहे

 पिता कभी नहीं कहते  मेरे पास पैसे नहीं हैं माँ ने कभी नहीं कहा मेरी तबियत खराब है  मैंने कभी नहीं कहा आज खाने में नमक कम है शायद सच ना बोलने से  दुनिया थोड़ी सुंदर बनी रहती है कविता कभी किसी से नहीं कहती पृथ्वी वासनाओं का सुंदर विस्तार है मन कभी अपने गुण नहीं बताता आत्मा कभी नहीं कहती  मोक्ष मन को मिली भिक्षा है उसकी उपलब्धि नहीं फूल कभी नहीं बताते  उनके चेहरे पर खिला रंग  उनका लहू है जो तितलियों के काटने से बहा है किसान कभी नहीं बताते  खेती करना उनकी मज़बूरी है और किसी दिन मज़बूर होकर छोड़ देंगे खेती सुंदर इमारतें कभी नहीं बताती  उन्होंने पीया है मजदूरों का गाया गीत  और कोई मोल नहीं दिया उसका पानी कभी नहीं बताता  उसकी नमी  पहाड़ों के हृदय से लिया गया उधार है  सड़कें कभी नहीं बताती इन पर चलकर बस हम यात्रा नहीं करते पृथ्वी भी पहुँचती रहती है कहीं  हमारे साथ चल कर बहुत दूर आ गई है पृथ्वी अब लौटना चाहती है मगर लौट नहीं सकती  लोग इसे सभ्यता का विकास कहते हैं  हमारी देह  अनंत यात्राओं का वृतांत है हमारी आंखे...