अपने होते हुए फरेबों की चिंता न करो दोस्त ।।
।। ए मेरे दोस्त ।।
किसी को ज्यादा दिल से न लगाओ दोस्त ।
किसी को हद से ज्यादा पसंद न करो दोस्त ।।
अपने ही पीठ पीछे खंजर खोंपते हैं यहां ।
किसी पर आंख बंद कर भरोसा न करो दोस्त ।।
बीच रास्ते में हाथ छोड़ तमाशा देखते हैं ।
सभी को अपना मान खुशी न मनाओ दोस्त ।।
चीनी को चींटी जैसे चिपक जाते हैं लोग ।
जानबूझकर खंडहर में न गिर जाओ दोस्त ।।
अपने स्वार्थ के लिए हाथ बढ़ाते हैं लोग ।
सोच समझकर लोगों से हाथ मिलाओ दोस्त ।।
अपने आप पर विश्वास रखना सदा ही यहां ।
जो छोड़ चले जाते हैं उन्हें मत पुकारो दोस्त ।।
जो तेरे अपने हैं सदा साथ निभाते हैं यहां ।
अपने होते हुए फरेबों की चिंता न करो दोस्त ।।
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