याद आ रहे है वो रिश्तें

 मेरी दुनिया टिकी है जिन स्तम्भों पर

  याद आ रहे है वो रिश्तें

      जो वक्त निकाल ,

    लम्बा सफर तय कर 

     आते थे मिलने /

     आँगन से विदा बखत

       पलट पलट कर  

     हाथ हिलाते थे 

ओझल होने तक /

इंतज़ार करते थे शिद्दत से

याद आ रहे है वो रिश्तें .....


ज़ेहन में कौंध रहे है अज़ीज चेहरे जो

देर तक गले लग 

 नम कर देते थे सारे जज़्बात /

जो करने को हैरान सुनाते थे

 मनगढ़ंत किस्से ../

बनाने महफ़िल की लज्ज़त

सुनाते थे लतीफ़े ढेरों 

और कर देते थे नीम दोपहरिया गुलकंद /

खुशी में दिल से होते थे शामिल 

मुश्किल में बहलाते थे तसल्लियाँ दे

वो स्तंभ याद आते है....


ये दुनिया मजबूत खगोलीय नियमों

 पर नही टिकी ,

ना ही चक्कर लगाती है ग्रहों के जादुई खिंचाव से

दुनिया तो टिकी है /

उन लोगो से जिन्हें भरोसा है कि

कुछ लोगों को उनसे बेहद प्यार है /

फेरे लगाती है उन रिश्तों के

जो उजालों को सराहते है /


दुनिया टिकी उन लोगों के भरोसे जो

नुकसान उठा कर भी भरोसा नही तोड़ते /

मन ना मिले तो बस जरा फ़ासले 

बना कर मिलते है

लेकिन नफ़रत नही करते है /

तमाम स्याह गुरवतों के बीच 

 मुस्कान के जुगनू का नूर ....


टूटे ख्वाबों के किरचें जेब में

फिर भी औरों को देने 

ढाँढस जिनकी मुठ्ठियों में /

जमी पर सबकी अपनी-अपनी एक दुनिया 

कुछ स्तम्भ जिन पर टिकी थी कुछ दुनिया 

वो स्तंभ ढह गए /

दुनिया किसी खगोलीय नियम पर नही टिकी

कुछ रिश्तों पर टिकी है....🙏🙏🙏



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