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Showing posts from September, 2021

वृहन्नला

मुहल्ले में वो दो तीन दिन पहले ही आई थी।लगभग पांच फीट नौ-दस इंच की लंबाई और स्लिम यानी फिट। अब चुकि स्त्री वेश धारण किया था तो स्त्रीलिंग का प्रयोग ही उचित रहेगा। अब ना वो स्त्री थी ना पुरुष तो,स्त्री -पुरुष दोनों निश्चिंत हुए। रेजिडेंट्स को कोई दिक्कत भी नहीं हुई। जिस घर में वो रहने आई थी, वो एक ईमानदार , सख्त और सेवानिवृत्त सेना के ऑफिसर का घर था तो सब यूं भी निश्चिंत से थे।सब को अपने काम से काम, वार्तालाप की संभावना भी कम। मुहल्ले में खुसर - फुसर जायज थी, लेकिन ज्यादा पूछताछ कोई नहीं कर पाती। उस घर के मालिक स्वयं सेवानिृत्ति के बाद गांव जाकर बस गए थे, और केयर टेकर देखभाल करता। कभी कभी घर देखने आते। अतः उनके निर्णय पर किसी को कोई आशंका नहीं थी। लेकिन मुझे हमेशा उत्सुकता रहती, उसके बारे में जानने की। प्रायः हर सुबह नौ बजे साधारण सिफॉन की साड़ी, छोटी मगर सुंदर आंखों में हल्का काजल और बड़ी सी बिंदी जो शायद वो अपने पहचान के लिए लगाती थी;लगाए घर से निकलती। चाल- ढाल से वही लगती जो वो थी।पर उसकी खूबसूरती और फिटनेस में अलग सा आकर्षण था कि मेरे सहित और भी स्त्रियों के मन में एक पल के लिए जरूर...

बड़ों की सेवा करना एक श्रेष्ठ धर्म है।

आज सुगंधा के कदम वापस गाँव की ओर लौटने को आतुर हैं। क्या गाँव की खुशबू उसे अपनी ओर खींच रही है? पच्चीस वर्ष पहले गाँव छोड़ा था उसने, पति सुनील के साथ, बेहतर ज़िंदगी की तलाश में। बच्चों के पालन-पोषण में ज़िंदगी कब इतना आगे निकल गई पता ही नहीं चला!  जब सुनील की एक्सीडेंट में मृत्यु हुई थी तो दोनों बच्चे पढ़ ही रहे थे। सुनील की पेंशन आती थी पर वह बढ़ते बच्चों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए नाकाफ़ी था। घरवालों ने वापस लौटने के लिए कहा पर बच्चों का भविष्य बनाने के लिए वह शहर में ही रुक गई। एक स्कूल में नौकरी मिलने से आर्थिक रूप से काफी सहूलियत हो गई थी। परन्तु ये बातें तो पुरानी हो गई हैं। अब तो दो साल से शिवांगी व शिवम दोनों ही नौकरी कर रहे हैं, एक बंगलौर में, दूजा पुणे। और वह यहाँ मेरठ में अकेले ही रह रही है। सोचा था कि नौकरी व सखियों में मन लग जाएगा परन्तु रोज़ लौटते वक्त खाली घर काट खाने को दौड़ता है। कितना मुश्किल है अकेले रहना! डिप्रेशन सा रहने लगा है उसे! कोई तो हो घर में! बच्चे पास बुलाते हैं, वह छुट्टियों में गई भी थी पर वह दुनिया रास नहीं आई उसे। छोटे शहर की वो... उस भागते-दौड़ते महानग...

बस यूँ ही

दो साल पहले ही शादी हुई है मेरी , यूँ तो सब ठीक है पर एक दिन मेरा ध्यान गया कि मेरी पत्नी धारा कपड़े सुखाने के लिए तार पर डालते समय अधोवस्त्र भी ऐसे ही खुले में फैला दिया करती है । मुझे याद आया कि जब माँ कपड़े सुखाया करतीं थीं तो कभी भी उनके सुखाए अधोवस्त्र यूँ दिखाई नहीं देते थे । क्यों ? मन सोचने लगा तो समझ आया कि वे हमेशा किसी कपड़े के नीचे उन्हें डाला करतीं थीं ताकि वे सबकी नज़र में ना आएँ । माँ की मदद करने के दौरान जब हम दोनों भाई किसी भी अधोवस्त्र को खुले में डाल देते थे तो माँ उन्हें हमेशा दूसरे कपड़े से ढँक देतीं थीं । मैंने धारा से कहा कि तुम अधोवस्त्र किसी भी जगह क्यों फैला देती हो ?  उसने भी बेहद सरलता से उत्तर दिया इसमें हर्ज क्या है ? अधोवस्त्र हैं तो दिखेंगे ही !  ‘ पर दिखाने की ज़रूरत भी क्या  है ? ‘ मैं ने पूछा  ‘ और छिपाने की ?’ उसने सवाल किया । मेरे पास कोई जवाब नहीं था पर फिर भी मैंने उसे बताया कि माँ चूँकि अधोवस्त्र ढँक कर रखतीं थीं तो हमारी आँखें उन्हें यूँ देखने की अभ्यस्त नहीं हैं । इसके बाद मैंने सोचा कि अब मुझे ही समय के साथ , धारा के साथ ही ...

8 lessons from the professional world that I wish I knew when I'd just graduated (Nikyugi)

  1. Learn to say no - To night outs, to some professional opportunities and occasionally to certain relationships. Saying ""Yes"" to everything will land you in places you wish to be rescued from.   2. Say yes to good energy - Whether its people or activities, look for the places where you feel a RISE in energy once your interaction with the place is over. Your energy levels are directly linked to your INSTINCT. Your instinct will shape up your career path for you if you let it. A drop in energy after an activity/meeting is a warning sign from your instinct.   3. Network is networth - Cliched but true. Learn to LEARN from everyone you meet. Even the bad ones. Keep the good ones close and work hard enough to become a ""good one"" yourself. Your network will grow in size and quality at the same pace that your achievement list grows. Work on both games!   4. Stay fit - No career exists without its ups & downs. Ups are easy to handle. Downs will...