वृहन्नला
मुहल्ले में वो दो तीन दिन पहले ही आई थी।लगभग पांच फीट नौ-दस इंच की लंबाई और स्लिम यानी फिट। अब चुकि स्त्री वेश धारण किया था तो स्त्रीलिंग का प्रयोग ही उचित रहेगा। अब ना वो स्त्री थी ना पुरुष तो,स्त्री -पुरुष दोनों निश्चिंत हुए। रेजिडेंट्स को कोई दिक्कत भी नहीं हुई। जिस घर में वो रहने आई थी, वो एक ईमानदार , सख्त और सेवानिवृत्त सेना के ऑफिसर का घर था तो सब यूं भी निश्चिंत से थे।सब को अपने काम से काम, वार्तालाप की संभावना भी कम। मुहल्ले में खुसर - फुसर जायज थी, लेकिन ज्यादा पूछताछ कोई नहीं कर पाती। उस घर के मालिक स्वयं सेवानिृत्ति के बाद गांव जाकर बस गए थे, और केयर टेकर देखभाल करता। कभी कभी घर देखने आते। अतः उनके निर्णय पर किसी को कोई आशंका नहीं थी। लेकिन मुझे हमेशा उत्सुकता रहती, उसके बारे में जानने की। प्रायः हर सुबह नौ बजे साधारण सिफॉन की साड़ी, छोटी मगर सुंदर आंखों में हल्का काजल और बड़ी सी बिंदी जो शायद वो अपने पहचान के लिए लगाती थी;लगाए घर से निकलती। चाल- ढाल से वही लगती जो वो थी।पर उसकी खूबसूरती और फिटनेस में अलग सा आकर्षण था कि मेरे सहित और भी स्त्रियों के मन में एक पल के लिए जरूर...