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Showing posts from October, 2021

ऊंच नीच

प्रसाद जी अपने बेटे की रिसेप्शन पार्टी में मुझ पर भड़के हुए थे मैं उनके बेटे की शादी में जो नही गया था । मुझे दो शादी के कार्ड मिले थे एक प्रसाद जी के बेटे के शादी का दूसरा कुमार साहब के बेटे की शादी का । कार्ड देने आये प्रसाद जी बोले , " तन के ठसके से चलो यार बारात में ! लड़के वाले हो लड़के वाले ! रौब पड़ना चाहिए बेचारे लड़की वालों पर ! वो भी क्या याद रखेंगे प्रसाद की बारात की हनक को !"  मुझे बड़ा अजीब लगा सुन कर ! खुद की दो दो बेटियाँ थीं शादी की पर वधूपक्ष के लिए ऐसी सोच ? बस शादी में जाने का मन ही नही हुआ ।  कुमार साहब ने भी कार्ड दिया और स्नेह से मेरा हाथ पकड़ कर बोले " आपको चलना ही है मेरे साथ शुभकार्य है ! घर मे लक्ष्मी लानी है लक्ष्मी ! चार ज़िम्मेदार आदमी होने चाहिये की नहीं मेरे साथ ! सम्मान विधि विधान में यदि मुझसे कोई ऊंच नींच हो गयी तो क्या सोचेंगें वधु के माता पिता ! " 

जंजीर

   "कब तक अपने पिता के घर में बैठी रहोगी सौम्या?. अपनी पसंद से ही सही विवाह कर तुम भी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने की कोशिश क्यों नहीं करती!".  आज सौम्या से मिलने आई उसकी बचपन की सहेली और अब दो प्यारे-प्यारे बच्चों की मांँ बन चुकी राधिका ने बातों ही बातों में सौम्या को सलाह दे दी लेकिन सौम्या ने उसे टालना चाहा.. "मेरी छोड़!.तू सुना जीजा जी कैसे हैं?" "वो ठीक है!" राधिका मुस्कुराई। "और बता!. घर में सब कैसे हैं?. तेरी सास पहले की तरह ही बात-बात पर तुझे ताने देती है या अब उनके व्यवहार में कुछ सुधार हुआ है?" सौम्या ने राधिका की खिंचाई की लेकिन राधिका मुस्कुराई.. "वह सब तो पुरानी बातें हैं सौम्या!.अब मेरे सास-ससुर का व्यवहार मेरे प्रति बिल्कुल बदल चुका है मेरे पति के साथ-साथ अब ससुराल के सभी लोग मुझे बहुत प्यार करते हैं और पता है!..इन बच्चों के बिना तो इनके दादा-दादी का मन ही नहीं लगता।" राधिका के चेहरे की ताजगी और चमक उसके सुखी परिवारिक जीवन की गवाही पहले ही खुलकर दे रहा था। "यह तो तुमने बहुत अच्छी बात बताई राधिका!" सौम्या ने अपनी सह...

नासमझ_आज़ादी

“मैंने रित्विक के साथ रहने (लिव-इन) का फैसला कर लिया है,” रिया ने एक एक शब्द पर जोर दिया। वह गुड़गाँव में एक पीजी में रहती थी, वीकएण्ड पर घर आई थी। उसके ये कहते ही घर में जैसे कि भूचाल आ गया था; बस दीवारें नहीं हिलीं थी और छत भी सलामत थी। अभी तक सिर्फ माँ ने ही रित्विक का नाम पहले सुन रखा था, लेकिन उसे भी ज्ञात न था कि रिया उससे प्रेम करती है। रिया ने अभी अभी एमबीए पूरा करके एक कंपनी में सेल्स एडवाइजर की पोस्ट पर जॉयन किया था। रिया की जॉब भी रित्विक ने ही लगवाई थी। वह उसी कंपनी में सेल्स मैनेजर था। “ये कैसे होगा? बिना शादी के तुम नासमझ_आज़ादी_WrongTurnउसके साथ कैसे रह सकती हो? अगर तुम्हें उससे प्रेम है, तो थोड़ा रुको, उसके माता-पिता से हम शादी की बात करते हैं, फिर रहो, कौन रोकता है,” उसके पिता खुले विचारों वाले थे। “रित्विक अभी दो साल तक शादी नहीं कर सकता। पहले उसकी बहन की शादी होगी, इसी साल, फिर हमारी शादी होगी,” रिया को जैसे सारी योजना समझा दी गई थी। “यदि रित्विक को तुमसे प्रेम है, तो वह रुकेगा न, तुम्हारे लिए! या तुम ही मरी जा रही हो, उसके साथ लिव-इन के लिए?” अब बड़े भैय्या बोले। “भ...