नासमझ_आज़ादी
“मैंने रित्विक के साथ रहने (लिव-इन) का फैसला कर लिया है,” रिया ने एक एक शब्द पर जोर दिया। वह गुड़गाँव में एक पीजी में रहती थी, वीकएण्ड पर घर आई थी।
उसके ये कहते ही घर में जैसे कि भूचाल आ गया था; बस दीवारें नहीं हिलीं थी और छत भी सलामत थी। अभी तक सिर्फ माँ ने ही रित्विक का नाम पहले सुन रखा था, लेकिन उसे भी ज्ञात न था कि रिया उससे प्रेम करती है। रिया ने अभी अभी एमबीए पूरा करके एक कंपनी में सेल्स एडवाइजर की पोस्ट पर जॉयन किया था। रिया की जॉब भी रित्विक ने ही लगवाई थी। वह उसी कंपनी में सेल्स मैनेजर था।
“ये कैसे होगा? बिना शादी के तुम नासमझ_आज़ादी_WrongTurnउसके साथ कैसे रह सकती हो? अगर तुम्हें उससे प्रेम है, तो थोड़ा रुको, उसके माता-पिता से हम शादी की बात करते हैं, फिर रहो, कौन रोकता है,” उसके पिता खुले विचारों वाले थे।
“रित्विक अभी दो साल तक शादी नहीं कर सकता। पहले उसकी बहन की शादी होगी, इसी साल, फिर हमारी शादी होगी,” रिया को जैसे सारी योजना समझा दी गई थी।
“यदि रित्विक को तुमसे प्रेम है, तो वह रुकेगा न, तुम्हारे लिए! या तुम ही मरी जा रही हो, उसके साथ लिव-इन के लिए?” अब बड़े भैय्या बोले।
“भैय्या आप भी! मुझे तो लगा आप मुझे सपोर्ट करेंगे। आपने भी तो भाभी से लव-मैरिज की है,” रिया ने नाटकीय अंदाज़ में कहा।
“इससे क्या मतलब? भैय्या ने तो कभी नहीं कहा लिव-इन के लिए। प्रेम करना कोई गुनाह नहीं, तुम्हें है, तो तुम कहो न!” पापा को अभी तक गुस्सा नहीं आया था।
“लिव-इन में रहना भी गुनाह नहीं है, पापा,” रिया बोली।
“पापा के प्रेम का अपमान न कर रिया,” माँ ने सालों बाद उसे डाँटते हुए चेताया।
“माँ, अब तो लिव-इन को कानूनन मान लिया गया है,” रिया जैसे हर बात के लिए तैयार थी।
“अच्छा! अगर दो साल बाद रित्विक तुझसे विवाह करने से इंकार कर दे तो क्या कानून रित्विक को बाध्य कर देगा? या तू ही रित्विक को दो साल बाद छोड़ना चाहती है? और अगर इस बीच कोई बच्चा हुआ तो?” माँ ने पूछा।
“माँ रित्विक मुझसे सच्चा प्रेम करता है, हमारे बीच वो सब नहीं होगा, बस साथ रहेंगे,” रिया माँ को समझाने लगी।
“तुम ऑफिस में साथ तो रहते हो, फिर बाद में फोन पर वीडियो कॉल भी होती ही होंगी, और कितना साथ? सच्चा प्रेम नहीं है ये। रित्विक बस एक सैक्स-पार्टनर चाहता है और कुछ नहीं। कितनी बेवकूफ हो तुम, एक लम्पट का प्रेम नहीं समझ पा रही हो!” माँ ने गुस्से से कहा।
“माँ!” रिया के स्वर में रोष और प्रतिरोध था।
“सुनो बेटा, तुम्हारी माँ का कहना सही है। हमने तुम पर आज तक कोई बंदिश नहीं रखी, तो तुम्हें लगा कि हम मान जाएंगे तुम्हारी हर नासमझी। लेकिन जो बात तुम्हारे लिए सही नहीं हम कैसे मान लें। रित्विक को बताओ कि तुम्हारे माता पिता लिव-इन के खिलाफ़ हैं, प्रेम के नहीं"।
रिया की आँखों में उलझन देख माँ ने उसे गले से लगाया—
"यदि रित्विक तुमसे सच्चा प्रेम करता है, तो वह समझ जाएगा, और नहीं तो तुम्हें भी पता चल जाएगा, रित्विक का प्रेम कितना सच्चा है। फिर तुम जो भी निर्णय लोगी, हमें साथ पाओगी। खुले विचारों का मतलब नासमझ आज़ादी नहीं है, मेरी बच्ची"।
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