ऊंच नीच
प्रसाद जी अपने बेटे की रिसेप्शन पार्टी में मुझ पर भड़के हुए थे मैं उनके बेटे की शादी में जो नही गया था । मुझे दो शादी के कार्ड मिले थे एक प्रसाद जी के बेटे के शादी का दूसरा कुमार साहब के बेटे की शादी का ।
कार्ड देने आये प्रसाद जी बोले , " तन के ठसके से चलो यार बारात में ! लड़के वाले हो लड़के वाले ! रौब पड़ना चाहिए बेचारे लड़की वालों पर ! वो भी क्या याद रखेंगे प्रसाद की बारात की हनक को !"
मुझे बड़ा अजीब लगा सुन कर ! खुद की दो दो बेटियाँ थीं शादी की पर वधूपक्ष के लिए ऐसी सोच ? बस शादी में जाने का मन ही नही हुआ ।
कुमार साहब ने भी कार्ड दिया और स्नेह से मेरा हाथ पकड़ कर बोले " आपको चलना ही है मेरे साथ शुभकार्य है ! घर मे लक्ष्मी लानी है लक्ष्मी ! चार ज़िम्मेदार आदमी होने चाहिये की नहीं मेरे साथ ! सम्मान विधि विधान में यदि मुझसे कोई ऊंच नींच हो गयी तो क्या सोचेंगें वधु के माता पिता ! "
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