मीनू
दस साल की मीनू के कमरे में जब माँ आई तो उन्होंने देखा, मीनू सो गई है, उसका लैपटॉप अभी भी खुला था , बंद करने गई तो उनकी नज़र शीर्षक पर चली गई, लिखा था, ‘ दादाजी का स्कूल’ , वह हैरान हो उसे पढ़ने लगीं । उसे लेख कहूँ या कहानी, मुझे पता नहीं, पर वो कुछ इस प्रकार था ; दो महीने पूर्व मेरे क्लास के बच्चे रवांडा जा रहे थे, गुरीला देखने के लिए, और वहाँ से कांगो का रेनफ़ारेस्ट देखने का कार्यक्रम भी था, यह मेरा स्कूल के साथ पहला अंतरराष्ट्रीय ट्रिप होता, परंतु तभी भारत से दादाजी का फ़ोन आया कि दादी बहुत बीमार हैं । पापा ने अपनी सारी मीटिंग कैंसल कर दी, और मम्मी ने मिनटों में टिकटें बुक कर दीं , और मैं इथोपियन ए्अर लाईनस की जगह एमिरेट के जहाज़ में बैठ गई । दादा दादी पिछले साल पूरे तीन महीने हमारे साथ यहाँ बोस्टन में बिता कर गए थे । दादाजी हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज थे, और तीन साल से अपने गाँव के पुश्तैनी घर में रह रहे थे । हम जब तक घर पहुँचे दादी जा चुकीं थी, वे अंतिम दर्शन के लिए हमारी प्रतीक्षा कर रहे थे । तब मैंने पहली बार मृतक शरीर देखा, और मुझे लगा, मृतक शरीर में भाव, बुध्दि , शक्ति, कुछ भ...