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Showing posts from July, 2023

हंसा उड़ जाएगा सब धरा रह जाएगा

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 चौथे माले पर फ्लैट था कर्ण जी का एम 441, लिफ्ट के एकदम सामने। सीढ़ी से अगर कोई चढ़े तो सबसे पहले उनका ही फ्लैट मिलेगा। मिसेज कर्ण को शिकायत थी कि इसमें पीछे की तरफ बालकनी है जबकि सामने होता तो शाम में चेयर लेकर बैठ भी जाते तो आने जाने वाले लोग, खेलते हुए बच्चे दिखते तो थोड़ा बहुत तो मन लग जाता। पर कर्ण जी का वश चलता, तो सोते- उठते भी अपने ज्योतिषाचार्य जी से पूछ कर हीं। फ्लैट बुक करने के पहले वह स्वामी जी से दरभंगा जाकर मिले थे। कितनी देर गणना करने के बाद स्वामी जी इस घर को अति शुभ बताए थे। वरना तीन बार तो उनकी सलाह की वजह से फ्लैट की बुकिंग कैंसिल किए थे कर्ण जी। उनके पिताजी भी दरभंगा में स्वामी जी के बताए शुभ घड़ी के हिसाब से भूमि पूजन और घर की नींव में पहली ईंट रखवाए थे। घर परिवार खूब फला फूला उनका और उसी अनुपात में ज्योतिषाचार्य जी भी फलते फूलते गए। ये बड़ी सी तोंद निकल आई थी उनकी, इस वजह से पालकी पर चलने लगे थे। आजकल पालकी की जगह इनोवा है। भक्तों की श्रद्धा की वजह से। उनके आधा दर्जन बच्चे काम की बारीकी सीख, उनके व्यापार को ऊंचाई पर ले जा रहे इन दिनों ।   कर्ण जी को थो...

अपने बुजुर्गों का सम्मान करें

 जब मृत्यु का समय निकट आया तो पिता ने अपने एकमात्र पुत्र धर्मपाल को बुलाकर कहा कि,  बेटा मेरे पास धन-संपत्ति नहीं है कि मैं तुम्हें विरासत में दूं। पर मैंने जीवनभर सच्चाई और प्रामाणिकता से काम किया है।  तो मैं तुम्हें आशीर्वाद देता हूं कि, तुम जीवन में बहुत सुखी रहोगे और धूल को भी हाथ लगाओगे तो वह सोना बन जायेगी। बेटे ने सिर झुकाकर पिताजी के पैर छुए। पिता ने सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और संतोष से अपने प्राण त्याग कर दिए। अब घर का खर्च बेटे धर्मपाल को संभालना था। उसने एक छोटी सी ठेला गाड़ी पर अपना व्यापार शुरू किया।  धीरे धीरे व्यापार बढ़ने लगा। एक छोटी सी दुकान ले ली। व्यापार और बढ़ा। अब नगर के संपन्न लोगों में उसकी गिनती होने लगी। उसको विश्वास था कि यह सब मेरे पिता के आशीर्वाद का ही फल है।  क्योंकि, उन्होंने जीवन में दु:ख उठाया, पर कभी धैर्य नहीं छोड़ा, श्रद्धा नहीं छोड़ी, प्रामाणिकता नहीं छोड़ी इसलिए उनकी वाणी में बल था। और उनके आशीर्वाद फलीभूत हुए। और मैं सुखी हुआ। उसके मुंह से बारबार यह बात निकलती थी।   एक दिन एक मित्र ने पूछा: तुम्हारे पिता में इतना...

स्वाद

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 लघुकथा "ताऊजी...आप तो बैठ जाओ आराम से आपकी प्लेट मैं लगाकर लाती हूँ।" एक विवाह समारोह के भोज में परेशान होते देख नेहा उनकी प्लेट लगाकर ले आई।ताईजी के गुजर जाने के साल भर बाद पहली बार किसी सामाजिक समारोह में शामिल हुए ताऊजी उसे कुछ असहज लग रहे थे। "तुझे पता है ...मुझे क्या खाना है?" ताऊजी हल्के से मुस्कुरा कर बोले। "अरे! कैसी बात करते हैं...बचपन में एक यही तो काम करती थी मै परोसने का...आप भूल गए क्या...मुझे पता है आपको ठंडी पूरियाँ पसंद है ।"  "नहीं बेटा,अब नहीं... ।" "तो क्या अब आपकी पसंद बदल गई है...।" वह उन के पास कुर्सी खींच कर बैठ गई।" “ तुम्हे तो पता है बेटा...परिवार में पंद्रह सोलह सदस्य थे...पूरियाँ होली,दीवाली पर ही बनती थी तब तुम्हारी ताई सबके लिए तो गर्म-गर्म पूरियाँ तलती थी।सबसे बाद में जब मैं और वह खाना खाते तो मैं यही कहता कि मुझे तो ठंडी पसंद है और गर्म उसकी थाली में रख देता...वरना तो वह गर्म कभी खा ही नहीं पाती...।" पत्नी की याद उनकी आँखों में झिलमिला रही थी। "ओह...तभी से चल पड़ा कि आप को ठंडी पूरी ही पसं...

सच्चाई और ईमानदारी

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 एक बढ़ई किसी गांव में काम करने गया, लेकिन वह अपना हथौड़ा साथ ले जाना भूल गया। उसने गांव के लोहार के पास जाकर कहा, 'मेरे लिए एक अच्छा सा हथौड़ा बना दो। मेरा हथौड़ा घर पर ही छूट गया है।' लोहार ने कहा, 'बना दूंगा पर तुम्हें दो दिन इंतजार करना पड़ेगा। हथौड़े के लिए मुझे अच्छा लोहा चाहिए। वह कल मिलेगा।' दो दिनों में लोहार ने बढ़ई को हथौड़ा बना कर दे दिया। हथौड़ा सचमुच अच्छा था। बढ़ई को उससे काम करने में काफी सहूलियत महसूस हुई। बढ़ई की सिफारिश पर एक दिन एक ठेकेदार लोहार के पास पहुंचा। उसने हथौड़ों का बड़ा ऑर्डर देते हुए यह भी कहा कि 'पहले बनाए हथौड़ों से अच्छा बनाना।' लोहार बोला, 'उनसे अच्छा नहीं बन सकता। जब मैं कोई चीज बनाता हूं तो उसमें अपनी तरफ से कोई कमी नहीं रखता, चाहे कोई भी बनवाए।' धीरे-धीरे लोहार की शोहरत चारों तरफ फैल गई। एक दिन शहर से एक बड़ा व्यापारी आया और लोहार से बोला, 'मैं तुम्हें डेढ़ गुना दाम दूंगा, शर्त यह होगी कि भविष्य में तुम सारे हथौड़े केवल मेरे लिए ही बनाओगे। हथौड़ा बनाकर दूसरों को नहीं बेचोगे।' लोहार ने इनकार कर दिया और कहा, ...