सन्तोषम परमं सुखम।

 कुछ लोगों को मैं देखता हूँ कि हमेशा परेशान रहते हैं 

उनको पैसे की कोई परेशानी नहीं रहती 

परिवार में सब सुखी हैं 

स्वास्थ्य भी अच्छा है 

लेकिन 

जब भी मैं उनसे बात करता हूँ वे हमेशा दुखी रहते हैं 

अपनी किसी ना किसी परेशानी का रोना रोते रहते हैं 

ज़्यादातर परेशानियाँ बहुत छोटी हैं और ignore की जा सकती हैं 

लेकिन वे हमेशा दुखी रहते हैं 

उनको ज़िंदगी में जो हासिल है वे उससे नहीं खुश रहते 

बल्कि जो नहीं हासिल है उसको सोच सोच कर दुखी रहते हैं 


वहीं दूसरी तरफ़ मैं रोज़ कई ऐसे लोगों को देखता हूँ जो रोज़ मज़दूरी करके खाते हैं या 

रोज़ छोटा मोटा काम करके खाते हैं और रोज़ ज़िंदगी में ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष करते हैं 

लेकिन वे लोग हमेशा ख़ुश रहते है और बिना बात के दुखी नहीं होते हैं 


बचपन में कभी अगर मुझे साइकिल चलाने को मिल जाती थी तो बहुत ख़ुशी होती थी 

और अगर कभी कुछ फ़िल्म वग़ैरह हाल में जाकर देखने को मिला जाए तो क्या कहने 

बड़ा मज़ा आता था 


फिर हम थोड़ा बड़े हुए और साइकिल की जगह Luna ने ले ली 

अब साइकिल में पहले जैसा वह मज़ा नहीं आता था और उतनी ख़ुशी नहीं होती थी


उसके बाद कुछ दिन Hero Puch नाम की एक two wheeler चलाया जो लूना से थोड़ा ऊपर की थी और बाइक से काफ़ी नीचे की थी 


फिर हम थोड़ा और बड़े हुए 

अब बारी थी बजाज स्कूटर की 

अब लूना और hero puch चलाने में वह पहले जैसा मज़ा नहीं आता था 

हाँ स्कूटर पर बहुत मज़ा आता था 

काफ़ी दिन तक स्कूटर चलाया और बहुत मज़ा किया 


उसके बाद स्कूटर से भी दिल भर गया 

उसमें वह पहले जैसा ख़ुशी नहीं मिलती थी 


फिर बारी आयी कार की 

पहले Maruti Omni फिर मारुति एस्टीम से शुरुआत किया और धीरे धीरे करते हुए अब Toyota Innova तक पहुँच गया 

जब पहली बार कार चलाना शुरू किया तो बहुत ख़ुशी हुई 

फिर धीरे धीरे आदत पड़ गई और ये एक नार्मल चीज हो गई 


अब मैं जल्दी से कार ख़ुद नहीं चलाता हूँ 

क्योंकि पहले जैसा मज़ा नहीं आता है 


लेकिन 

अब कभी अगर साइकिल चलाने को मिल जाये और रोड अगर ख़ाली है तो बहुत मज़ा आता है और बहुत ख़ुशी मिलती है

क्योंकि वह मेरे लिये नार्मल नहीं है 


जीवन में हर आदमी का कुछ ना कुछ उद्देश्य होता है जिसको वह प्राप्त करना चाहता है 

अगर वह उसको मिल जाये तो बहुत अच्छा लगता है लेकिन फिर धीरे वह चीज उस आदमी के लिए एक सामान्य चीज हो जाती है और वह पहले जैसी ख़ुशी नहीं मिलती है 


पहले मुझे सिनेमा हाल में जाकर मूवी देखने में बहुत मज़ा आता था और घर में बैठना ख़राब लगता था 

आजकल मुझे घर में बैठ कर पढ़ना अच्छा लगता है क्योंकि आजकल घर पर रहने समय कम रहता है और मेरे लिये वही luxury है 


कोई भी आदमी हमेशा ख़ुश नहीं रह सकता है 

जीवन के अनेक रंग हैं और उसमें ख़ुशी भी एक रंग है 


ख़ुशी दरअसल आदमी के अंदर से आती है 


और ख़ुशी आप बाहरी चीजों से हमेशा के लिए नहीं पा सकते हैं 


बाहरी चीजें आदमी को कुछ हद तक और कुछ समय तक खुश रख सकती हैं 

लेकिन आपने अंदर अगर संतोष है और अगर आप का विचार सुलझा हुआ है तो आपको अपने अंदर से ख़ुशी मिलेगी और



वह ख़ुशी हमेशा के लिए रहती है मतलब permanent ख़ुशी मिलती है

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