We all need stories to survive!!
यह किस्सा मैंने महान वैज्ञानिक और मेरे प्रेरणा-स्त्रोत कार्ल सगन की पुस्तक में पढ़ा था। किस्सा कुछ यूं था कि एक बार कार्ल अपने किसी साथी के साथ किसी रेस्टोरेंट में डिनर कर रहे थे। अचानक बाहर लोगों का शोर गूंजने लगा। कार्ल सगन ने बाहर निकल कर देखा तो पाया कि आसमान में एक अजीब तरीके की रोशनी टिमटिमा रही है, जिसे "एलियंस का स्पेसशिप" समझ कर लोग उत्साह में शोर मचा रहे थे।
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इतने में कार्ल अपनी गाड़ी के पास गए और डिक्की में रखी एक दूरबीन को लेकर उस रोशनी का मुआयना करने लगे। कुछ ही क्षण बाद कार्ल ने मुस्कुराते हुए लोगों को सूचित किया कि आंदोलित होने की जरूरत नहीं। ये वास्तव में एक नये तरह का मिलिट्री एयरक्राफ्ट है, कोई एलियन शिप नहीं।
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इतना सुनना था कि वहां मौजूद लोगों की खुशी काफूर हो गयी, चेहरे मायूस हो गए, मानों यह खबर सुनकर उन्हें बहुत दुःख हुआ हो। कार्ल ने एक व्यक्ति से इसका कारण पूछा तो पहले तो उसने कार्ल को घूरा, फिर बोला - आपको लगता है कि डिनर टेबल पर बैठ कर बच्चों को "नए तरीके का मिलिट्री जेट" देखने की कहानी सुनाना भी कोई रोचक बात है?
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देखा जाए तो लोग मायूस इसलिए थे, क्योंकि कार्ल सगन ने उनसे उनकी जिंदगी की एक "रोचक कहानी" को उनसे छीन लिया था।
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मनुष्य की चेतना किसी बेलगाम घोड़े जैसी चलायमान है। इसे जीने के लिए महान उद्देश्यों का अवलंबन चाहिए, बड़े प्रयोजनों में अपनी भूमिका चाहिए, ईश्वर के प्रिय पुत्र होने का आश्वासन चाहिए, ब्रह्मांड के सबसे खास जीव होने की श्लाघा चाहिए।
............ इसलिए मनुष्य निरंतर कहानियों की रचना कर इस जीवन को तो रोचक बनाना चाहता ही है, वस्तुतः जीवन के बाद भी किसी तरह अपनी हस्ती बचाए रखना चाहता है - कभी पुनर्जन्म के माध्यम से, तो कभी जजमेंट डे अथवा स्वर्ग-नर्क इत्यादि के किस्सों से।
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अगर किसी इंसान को यह प्रतीत हो जावे कि उसकी इस विराट ब्रह्मांड में कोई औकात नहीं, उसकी बनाई कहानियों का वास्तविकता में कोई मोल नहीं, उसकी प्रार्थनाओं का उत्तर देने वाला कोई ईश्वर इस संसार में नहीं, मृत्यु के बाद कुछ भी नहीं - सिवाय शाश्वत अंधकार के - तो ऐसा मनुष्य क्षण भर में अचेत होकर भूमि पर गिर पड़ेगा।
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देखा जाए तो बिना मनोहर कहानियों के इंसान नामक जीव जिंदा रह ही नहीं सकता।
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We all need stories to survive!!


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