मेरी खुद की ज़िन्दगी का एक छोटा सा अनुभव
बेटे भी घर छोड़ के जाते हैं..
अपनी जान से ज़्यादा..प्यारे माँ बाप भाई बहिन को छोड़ कर...
अलमारी के ऊपर रखा...बचपन की जिद्द से मंगाया धूल खाता वो सामान छोड़ कर...
बचपन से लेकर स्कूल तक के दोस्तों और पड़ोस के अपनेपन को छोड़कर...
मेज़ पर बेतरतीब पड़ी...वर्कशीट, किताबें, काॅपियाँ और खुद के विचारो की लिखी हुई डायरी जो छुपाते थे सबसे
सब कुछ यूँ ही छोड़ जाते है...
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!
बचपन की उन गलियो को.. अपनों और परायो के दुःख और सुख को भी छोड़ जाते है...
अपनी मन पसन्द ब्रान्डेड...जीन्स और टीशर्ट
अलमारी में कपड़े जूते...और वो सब अपना सामान जिसको...
हाथ नहीं लगाने देते थे... वो सबकुछ छोड़ जाते हैं...
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!
जो तकिये के बिना कहीं...भी सोने से कतराते थे...
आकर कोई देखे तो वो... कहीं भी अब सो जाते हैं...
खाने में सौ नखरे करने वाले..अब भूखे भी रह लेते है या वेवक्त कुछ भी खा लेते हैं...
अपने रूम में किसी को...भी नहीं आने देने वाले...
अब हॉस्टल के एक रूम में एक अनजान रूममेट के साथ एडजस्ट हो जाते हैं...
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!
घर को याद करते हैं लेकिन...कहते हैं 'बिल्कुल ठीक हूँ'...वो अपनी खुशियां अपने आंसू अपने अंदर ही छुपाये रखते है।
सौ-सौ ख्वाहिश रखने वाले...अब कहते हैं 'कुछ नहीं चाहिए'...
खुद से समझौते करके... वो दुसरो की खुशियां बढ़ाते है....
परिवार होता है फिर भी खुद को अकेले पाते हैं..
घर से जब वापस आते है तब अपने अश्क़ छुपाते है।।
पैसे कमाने की होड़ में...वो भी कागज बन जाते हैं... सच कहते है कुछ सपनो को सच करने में कुछ अपने छोड़ आते है....
बेटे भी घर छोड़ जाते है......
घर आंगन की मुस्कान भले ही बेटियों से होती है...
लेकिन ये भी सच है बेटे भी घर की रौनक कहलाते हैं
बेटे भी घर छोड़ कर जाते हैं!
बेटी के साथ बेटे भी हर काम में हाथ बटाने से जरा भी नहीं कतराते हैं...
बेटे भी घर छोड़ कर जाते हैं!
सिर्फ बेटियां ही नहीं
बेटे भी घर छोड़ के जाते हैं..
मेहमान की तरह घर आते जाते हुए ...
बेघर हो गए पढ़ते और कमाते हुए!
सुधिजन मेरे बेटे को अपना आशीर्वाद जरूर दीजिएगा 🙏



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