Posts

Showing posts from November, 2019

किवाड़

क्या आपको पता है ? कि किवाड़ की जो जोड़ी होती है, उसका एक पल्ला पुरुष और, दूसरा पल्ला स्त्री होती है। ये घर की चौखट से जुड़े - जड़े रहते हैं। हर आगत के स्वागत में  खड़े रहते हैं। खुद को ये घर का  सदस्य मानते हैं। भीतर बाहर के हर रहस्य जानते हैं।। एक रात उनके बीच था संवाद। चोरों को लाख - लाख धन्यवाद वर्ना घर के लोग हमारी एक भी चलने नहीं देते। हम रात को आपस में मिल तो जाते हैं, हमें ये मिलने भी नहीं देते। घर की चौखट के साथ हम जुड़े हैं, अगर जुड़े जड़े नहीं होते तो किसी दिन तेज आंधी -तूफान आता, तो तुम कहीं पड़ी होतीं, हम कहीं और पड़े होते।। चौखट से जो भी  एक बार उखड़ा है। वो वापस कभी भी नहीं जुड़ा है। इस घर में ये जो झरोखे , और खिड़कियाँ हैं। यह सब हमारे लड़के और लड़कियाँ हैं।। तब ही तो इन्हें बिल्कुल खुला छोड़ देते हैं। पूरे घर में जीवन रचा बसा रहे, इसलिये ये आती जाती हवा को, खेल ही खेल में ,घर की तरफ मोड़ देते हैं। हम घर की  सच्चाई छिपाते हैं। घर की शोभा को बढ़ाते हैं ।   भले कुछ भी खास नहीं ,  पर उससे ज़्यादा बतलाते हैं। इसीलिये घर ...

अगर_भारत_की_सारी_अद्भुत_जगहों_के_बारे_में_लिखूं_तो कविता_नहीं_किताब_बन_जाये ?

सुनो.... मैं कहाँ करूँगी तुमसे uk लंदन जाने की ज़िद मुझे पसंद ही नहीं है दूसरा देश... हम ना बनारस चलेंगे.... घाटों की ढ़लती शामों में.... दोनो पैरों को पानी में डालके.... हम बातें करेंगे ढेर सारी.... और वो जो बिंदी खरीदी थी हमने उस मंदिर वाली दुकान से... मैं लगा के आऊँगी.... फिर दोनों करेंगे आरती .. गंगा मैया की.... हम ना वृन्दावन भी चलेंगे महसूस करेंगे वो ज़िन्दगी.... जो मेरे कान्हा ने राधे के साथ जी होगी.... तुम लगा देना उन फूलों को मेरे बिखरे हुवे बालों में... जो उस पावन धरती पे गिरे होंगे... हम बैठेंगे मधुवन में देखेंगे रास जियेंगे हर ख़्वाब जो कभी राधे ने कृष्ण को दिखाए होंगे और सुनो.... फिर चलेंगे हम वहाँ जिसे ग़ुलाबी शहर कहते हैं अपने प्रीत का रंग भी तो गुलाबी ही है ना मैं क्यूँ कहूँगी तुमसे 5 सितारा होटल की ख़्वाहिश.... हम सड़क के किनारे ढाबे पे बाटी चोखा खाएंगे.... कैपचिनो और जाने क्या क्या पीते हैं लोग हम तुम्हारे साथ टपरी वाली चाय पिया करेंगे हमारे ख़्वाब महंगे नहीं अजीब है हम भारत के हैं.... यहीं की खूबसूरती को निहारते रह जाएंगे❤️❤️❤️ ...

अर्ध रात्रि का ज्ञान

सोचा है कभी आपने ’’अरे! क्या हुआ कल तक तो भले चंगे थे, और आज हार्ट अटैक!’’ मैंने आश्चर्य ये पूछा। ’’दो नंबर का माल भरा पड़ा है पर कहीं लगा नहीं पा रहे हैं, इसलिए बहुत दिनों से टेंशन में चल रहे थे।’’ समीर ने हंसकर कहा। तो मैं आश्चर्य में डूबा रहा क्योंकि मुझे ये समझ ही नहीं आ रहा था कि इतना कितना माल था जो कहीं इनवेस्ट नहीं कर पा रहे हैं। आखिर मैंने पूछ ही लिया। ’’यार! कितना पैसा होगा जो इनवेस्ट नहीं कर पा रहा है ?’’ ’’तुम और हम कल्पना नहीं कर सकते, इतना पैसा है। तनखा लगभग पचास हजार, चाय नाश्ता पानी पेट्रोल, दारू मुफ्त में। इसके बाद कमीशन पांच परसेंट।’’ समीर आंखें बड़ी करके बोला। ’’तो?’’ मेरे मुंह से कोई आश्चर्य प्रगट नहीं हो रहा था। समीर मुझे घूर कर देखता हुआ पूछा। ’’अच्छा! तुम ही बताओं वो सब इंजीनियर कितना कमाता होगा दो नंबर का ?’’ मैं एक पल को सोचा और बोला-’’बीस-तीस-पचास हजार रूपया महीना।’’ मेरी इस बात पर समीर हंस पड़ा और बोला-’’बस यही कमी है हमारे देशवासियों की। वो अपनी कमाई से दूसरों की तुलना करते हैं। जबकि उनकी और देशवासियों की कमाई की कोई तुलना नहीं है।’’ ’’......’’ मैं ...

एक चर्चा हिन्दू संस्कृति की

सुहागन रहो, सौभाग्यवती भव आदि पति के ज़िंदा रहने का आशीष ख़ूब मिलते हैं महिलाओं को, पत्नी जिए-ऐसा कोई आशीष सुना आजतक? सवाल आलोचना का नही, सुधार का है. हम पहले भी बदलते रहे हैं, अब भी बदलें। हमारी संस्कृति एक विज्ञान है जिसमें श्रेष्ठतम को स्थान दिया जाता है। और श्रेष्ठतम भी कैसा ? ऐसा श्रेष्ठ जो किसी अन्य को नुकसान न पहुंचाये, सिर्फ और सिर्फ अपना ही काम करे। सर्वे भवन्तु मंगलम! हमारे कृत्य से जो उद्देश्य लिया है वो तो पूरा हो जाये और उसके साथ ही किसी अन्य का नुकसान न हो भले ही लाभ हो जाये। ग़ौर कीजिए न- पुरुषों को भी गाली अगर दी जाय तो वह महिलाओं की ही होती है. इसके उलट महिलाओं को भी आशीर्वाद दिया जाय तो वह पुरुषों के लिए ही होता है. क्या यह सही है? क्या इन छोटे-छोटे बदलावों पर हमें ध्यान नही देना होगा? बदलना नही चाहिए हमें? सच ही तो है ये बात! हमें अपने समाज में ऐसी विरोधाभासी चीजों को ढूंढ ढूंढ कर नष्ट किये जाने की आवश्यकता है। और भी बहुत सी बातें हैं जिनके विरोध की आवश्यकता है। यहां एक बात विचारणीय है कि आज हम बहुत सी बातों को जानने का दावा करते हैं, क्या हम आज अपनी पढ़ाई में प...