अगर_भारत_की_सारी_अद्भुत_जगहों_के_बारे_में_लिखूं_तो कविता_नहीं_किताब_बन_जाये ?

सुनो....

मैं कहाँ करूँगी तुमसे uk लंदन जाने की ज़िद
मुझे पसंद ही नहीं है दूसरा देश...

हम ना बनारस चलेंगे....
घाटों की ढ़लती शामों में....
दोनो पैरों को पानी में डालके....
हम बातें करेंगे ढेर सारी....

और वो जो बिंदी खरीदी थी हमने
उस मंदिर वाली दुकान से...
मैं लगा के आऊँगी....
फिर दोनों करेंगे आरती ..
गंगा मैया की....

हम ना वृन्दावन भी चलेंगे
महसूस करेंगे वो ज़िन्दगी....
जो मेरे कान्हा ने राधे के साथ
जी होगी....

तुम लगा देना उन फूलों को
मेरे बिखरे हुवे बालों में...
जो उस पावन धरती पे गिरे होंगे...
हम बैठेंगे मधुवन में
देखेंगे रास जियेंगे हर ख़्वाब
जो कभी राधे ने कृष्ण को दिखाए होंगे

और सुनो....
फिर चलेंगे हम वहाँ
जिसे ग़ुलाबी शहर कहते हैं
अपने प्रीत का रंग भी तो
गुलाबी ही है ना

मैं क्यूँ कहूँगी तुमसे 5 सितारा
होटल की ख़्वाहिश....
हम सड़क के किनारे ढाबे पे
बाटी चोखा खाएंगे....

कैपचिनो और जाने क्या
क्या पीते हैं लोग
हम तुम्हारे साथ टपरी वाली चाय पिया करेंगे

हमारे ख़्वाब महंगे नहीं अजीब है
हम भारत के हैं....
यहीं की खूबसूरती को
निहारते रह जाएंगे❤️❤️❤️




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