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Showing posts from January, 2020

वसंत-प्रकृति-धरा

धरा - सखी , ये किसकी आहट है ? प्रकृति - ये वसंत की आहट लगती है .. धरा - कौन वसंत ? हेमंत का भाई ऋतुराज वसंत ? प्रकृती - हाँ , वही तुम्हारा ऋतुराज वसंत ...:)) धरा - और ये शिशिर ? प्रकृति - वो अब जाने वाला है ... धरा - सुनो , मैं कैसी दिख रही हूँ ... प्रकृति - बेहद ख़ूबसूरत ... धरा - सच बोल रही हो ...न.. प्रकृति - मैंने कब झूठ बोला है ... धरा - ऋतुराज के साथ और कौन कौन है ... प्रकृति - कामदेव हैं ... धरा - ओह ...फिर मुझे सजना होगा ... प्रकृति - मैंने तुम्हारा श्रृंगार कर दिया है ... धरा - वो कब और कैसे ... प्रकृति - सरसों के लहलहाते खेतों से ..आम्र की मंजरिओं से ... धरा - सुनो , फागुन भी आएगा ..न ... प्रकृति - तुम बुलाओ और वो न आए ...:)) धरा - अबीर के संग आएगा ? प्रकृति - गुलाल के संग भी ... धरा - सुनो ..मेरा और श्रृंगार कर दो ... प्रकृति - सूरज की नज़र लग जाएगी ... धरा - सुनो ..ये ऋतुराज वसंत कब तक रुकेंगे ? प्रकृति - कहो तो ...पूरे वर्ष रोक लूँ ... धरा - नहीं ...नहीं...सच बताओ न ... प्रकृति - चैत कृष्ण पक्ष तक तो रुकेंगे ही ... धरा - कामदेव कहाँ हैं ? प्रकृ...

सभी महिलाओं को समर्पित

कई साल पहले एक बड़े कॉर्पोरेट हाउस ने बेंगलोर में मैनेजमेंट गुरुओं का एक सम्मेलन कराया था। उसमे एक सवाल पूछा गया था। आप सफलतम मैनेजर किसे मानते हैं? विशेषज्ञों ने... रोनाल्ड रीगन से नेल्सन मंडेला तक, चर्चिल से गांधी तक, टाटा से हेनरी फोर्ड तक, चाणक्य से बिस्मार्क तक, और न जाने कितने और नाम सुझाये। पर ज्यूरी ने कुछ और ही सोच रखा था। सही उत्तर था  सफलतम प्रबंधक है... "एक आम गृहिणी ।" एक गृहिणी परिवार से किसी का ट्रांसफर नहीं कर सकती। किसी को सस्पेंड नहीं कर सकती। किसी को टर्मिनेट नहीं कर सकती। और, किसी को अपॉइंट भी नहीं कर सकती। परन्तु फिर भी सबसे काम करवाने की क्षमता रखती है। किससे, क्या और कैसे कराना है... कब प्रेम के राग में हौले से काम पिरोना है... और कब राग सप्तक पर उच्च स्वर में भैरवी सुना कर जरूरी कामों को अंजाम तक पहुंचाना है... उसे पता होता है। मानव संसाधन प्रबंधन का इससे बेहतर क्या उदहारण हो सकता है? बड़े बड़े उद्योगों में भी कभी कभी इसलिए काम रुक जाता है क्योंकि जरूरी फ्यूल नहीं था या कोई स्पेयर पार्ट उपलब्ध नहीं था या कोई रॉ मटेरिय...

रजनीगन्धा

रजनीगन्धा थी क्या तुम पिछले जनम में सोचता हूँ मैं यही हर बार तुमसे मिलकर लौटते हुए पता है तुम्हें कैसी सुगन्ध का लिहाफ़ उढा जाती हो तुम मुझे सुवासित हो उठती है देह मेरी - सांसें मेरी लाचार सी हो जाती है कार की परफ़्यूम भी गन्ध से तुम्हारी देह की चिपक सी जाती है छुवन तुम्हारी मेरी उंगलियों की पोरों में घुल सी जाती है सुगन्ध तुम्हारी मेरी सांसों में और थमा सा रह जाता है वो पल तुम्हारे साथ गुज़रा हुआ अटका सा रह जाता है वो पल मेरी शर्ट के कॉलर में मेरी आँखों में मेरी उंगलियों में और मेरी सांसों में रजनीगन्धा थी क्या तुम पिछले जनम में

एक था राजा - एक थी रानी'; याद है

अधूरे ख्वाब की रोती निशानी याद है हजारों शेर हमको मुंहज़बानी याद है। दिसम्बर की गुलाबी धूप की कातिल समां  बिखरते जुल्फ- ओ-कुर्ता आसमानी याद है।  'कामयाबी' यूँ तो उसके दर पे है इश्क में वो 'मुंह की खानी' याद है। नया घर है, नये कपड़े, नये बर्तन पुराने शहर की बातें पुरानी याद है। 'दादी माँ' की याद धुंधली हो रही है 'एक था राजा - एक थी रानी'; याद है

रेस्त्रां

रात मैं पत्नी के साथ होटल में रुका था। सुबह दस बजे मैं नाश्ता करने गया। क्योंकि नाश्ता का समय साढ़े दस बजे तक ही होता है, इसलिए होटल वालों ने बताया कि जिसे जो कुछ लेना है, वो साढ़े दस बजे तक ले ले। इसके बाद बुफे बंद कर दिया जाएगा। कोई भी आदमी नाश्ता में क्या और कितना खा सकता है? पर क्योंकि नाश्ताबंदी का फरमान आ चुका था इसलिए मैंने देखा कि लोग फटाफट अपनी कुर्सी से उठे और कोई पूरी प्लेट फल भर कर ला रहा है, कोई चार ऑमलेट का ऑर्डर कर रहा है। कोई इडली, डोसा उठा लाया तो  एक आदमी दो-तीन गिलास जूस के उठा लाया। कोई बहुत से टोस्ट प्लेट में भर लाया और साथ में शहद, मक्खन और सरसो की सॉस भी। मैं चुपचाप अपनी जगह पर बैठ कर ये सब देखता रहा । एक-दो मांएं अपने बच्चों के मुंह में खाना ठूंस रही थीं। कह रही थीं कि फटाफट खा लो, अब ये रेस्त्रां बंद हो जाएगा। जो लोग होटल में ठहरते हैं, आमतौर पर उनके लिए नाश्ता मुफ्त होता है। मतलब होटल के किराए में सुबह का नाश्ता शामिल होता है। मैंने बहुत बार बहुत से लोगों को देखा है कि वो कोशिश करते हैं कि सुबह देर से नाश्ता करने पहुंचें और थोड़ा अधिक खा लें ताकि दो...

एक संत क़ी अमूल्य शिक्षा

1. एक ही सिद्धांत, एक ही इष्ट एक ही मंत्र, एक ही माला, एक ही समय, एक ही आसन, एक ही स्थान हो तो जल्दी सीधी होती है। 2. विष्णु, शंकर, गणेश, सूर्य और देवी - ये पाँचों एक ही हैं। विष्णु क़ी बुद्धि 'गणेश' है, अहम् 'शंकर', नेत्र 'सूर्य' है और शक्ति 'देवी' है। राम और कृष्ण विष्णु के अंतर्गत ही हैं। 3. कलियुग में कोई अपना उद्दार करना चाहे तो राम तथा कृष्ण क़ी प्रधानता है, और सिद्दियाँ प्राप्त करना चाहे तो शक्ति तथा गणेश क़ी प्रधानता है- 'कलौ चणडीविनायकौ'। 4. औषध से लाभ न तो हो भगवान् को पुकारना चाहिए। एकांत में बैठकर कातर भाव से, रोकर भगवान् से प्रार्थना करें जो काम औषध से नहीं होता, वह प्रार्थना से हो जाता है। मन्त्रों में अनुष्ठान में उतनी शक्ति नहीं है, जितनी शक्ति प्रार्थना में है। प्रार्थना जपसे भी तेज है। 5. भक्तों के नाम से भगवान् राजी होते हैं। शंकर के मन्दिर में घंटाकर्ण आदि का, राम के मन्दिर में हनुमान, शबरी आदि का नाम लो। शंकर के मन्दिर में रामायण का पाठ करो। राम के मन्दिर में शिव्तान्दाव, शिवमहिम्न: आदि का पाठ करो। वे राजी हो जायें...
हम अपनी आँगन की *तुलसी* को संभाल नहीं पाए,.. इसलिए शायद हमारे बच्चे *क्रिसमस ट्री* के दिवाने होते जा रहे है... जय श्री कृष्ण🙏🏼