सावन मनभावन हम सभी के जीवन में मनभावन सावन से जुड़ी कुछ खट्टी-मीठी यादें ,कुछ किस्से-कहानियाँ जरुर होते हैं । किसी दोस्त,परिवार या प्यार के साथ बीता कोई बरसात का दिन और कुछ नही तो बचपन में अपने शरारती मनभावन सावन दोस्तों के साथ मिलकर झमाझम बरसात में की गई ढेर सारी शैतानियाँ,इन्हें तो कोई भुला ही नही सकता ।ये टिप टिप करती बूँदें जाने क्या -क्या भूला बिसरा याद दिलाती हैं ! यादों का शहद घुला होता है इन बूंदों में ...! ये बूँदें बहुत कुछ कहती है गुनगुनाती है पर चौतरफा शोर से घिरे हुए हम इन्हे अनसुना कर देते है । ये और-और की तृष्णा औरों से ज्यादा जोड़ने की चाहत और बाहर -भीतर के शोर से घिरे हम जब अपनी ही आवाज़ को अनसुना कर देते है तो भला बूँदों की आवाज़ को कैसे सुनेंगे !! वरना कौन ऐसा है जिसे झमाझम बारिश को देख बचपन की शैतानियां याद ना आती हो ! बूंदों के हथेलियाँ को छूते ही यादों के सन्दूक खुद व खुद खुल जाते हैं । आज सावन को खिड़की से देखते हुए जब छन -छन करती बूँदों के सुर में पत्तों को थिरकते देखा तो अहसास हुआ कि जीवन की आपाधापी में जाने कब इतने व्यस्त...
1) India After Gandhi – Ramchandra Guha 2) Indian Philosophy – Dr S. Radhakrishnan 3) A House for Mr. Vishwas – V.S. Naipaul 4) Oliver Twist – Charles Dickens 5) Hard Times – Charles Dickens 6) The Essays – Francis Bacon 7) Dreams from my Father – Barack Obama 8) War & Peace – Leo Tolstoy 9) The God of Small Things – Arundhati Roy 10) Gora – Rabindranath Tagore 11) Hot Days Long Nights – Nadezda Obradovic 12) The Wind from the Hills – Sethu 13) Reading Gandhi – Kusumlata Chaddha 14) The Argumentative Indian – Dr. Amartya Sen 15) Sherlock Holmes - Arthur Conan Doyle 16) India : An Introduction - Khushwant SIngh 17) Muhammad Ali- Graphic Novel (Campfire) 18) Jonathan Livingston Seagull - Richard Bach 19) William Shakespeare’s The Empire Striketh Back – Ian Doescher 20) Snow - Orhan Pamuk 21) Twenty Love Poems and a Song of Despair : Pablo Neruda 22) The Book Thief - Markus Zusak 23) 1984 - George Orwell ***************Hindi Literature*****...
" भैया, परसों नये मकान पे हवन है। छुट्टी (इतवार) का दिन है। आप सभी को आना है, मैं गाड़ी भेज दूँगा।" छोटे भाई लक्ष्मण ने बड़े भाई भरत से मोबाईल पर बात करते हुए कहा। " क्या छोटे, किराये के किसी दूसरे मकान में शिफ्ट हो रहे हो ?" " नहीं भैया, ये अपना मकान है, किराये का नहीं ।" " अपना मकान", भरपूर आश्चर्य के साथ भरत के मुँह से निकला। "छोटे तूने बताया भी नहीं कि तूने अपना मकान ले लिया है।" " बस भैया ", कहते हुए लक्ष्मण ने फोन काट दिया। " अपना मकान" , " बस भैया " ये शब्द भरत के दिमाग़ में हथौड़े की तरह बज रहे थे। भरत और लक्ष्मण दो सगे भाई और उन दोनों में उम्र का अंतर था करीब पन्द्रह साल। लक्ष्मण जब करीब सात साल का था तभी उनके माँ-बाप की एक दुर्घटना में मौत हो गयी। अब लक्ष्मण के पालन-पोषण की सारी जिम्मेदारी भरत पर थी। इस चक्कर में उसने जल्द ही शादी कर ली कि जिससे लक्ष्मण की देख-रेख ठीक से हो जाये। प्राईवेट कम्पनी में क्लर्क का काम करते भरत की तनख़्वाह का बड़ा हिस्सा दो कमरे के किराये के मकान और लक्ष्मण की पढ़ाई ...
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