एक था राजा - एक थी रानी'; याद है

अधूरे ख्वाब की रोती निशानी याद है हजारों शेर हमको मुंहज़बानी याद है। दिसम्बर की गुलाबी धूप की कातिल समां  बिखरते जुल्फ- ओ-कुर्ता आसमानी याद है।  'कामयाबी' यूँ तो उसके दर पे है इश्क में वो 'मुंह की खानी' याद है। नया घर है, नये कपड़े, नये बर्तन पुराने शहर की बातें पुरानी याद है। 'दादी माँ' की याद धुंधली हो रही है 'एक था राजा - एक थी रानी'; याद है

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