जब तुम साथ..

 

जब तुम

साथ चलती हो


मेरे बाजुओं में

बादलों के पंख

उग आते हैं


पहाड़ों में

जाने कहां से

झरते हुए सोते

निकल आते हैं


जंगल में

वनदेवी

हमारा साथ देने

पग-पग पर मचलती है


हरे-भरे खेतों से गुजरते समय

बाएं नीलकंठ

और 

दाएं हारिल

उड़ते चलते हैं


जब तुम

साथ चलती हो 


तो समय

ऋषिकेश के गंगा की तरह

निर्मल-कलकल-मचलता चलता है


जब तुम

साथ चलती हो


तो एक पाल वाली नाव

हम दोनों को लेकर

समुंदर में

अपने में मगन चलती है


जब तुम

साथ चलती हो


तो

हम ही चलते हैं


और दुनिया

बस अचरज से 

भौंचक देखती है !



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