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Showing posts from August, 2024

कमाल

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 फ्रांस में एक तैराक हुए, जेवियर! फ्रांस के लिए उन्होंने ओलंपिक तक खेला। उन्हें फ्रांस के अच्छे तैराकों में गिना जाता रहा है। पर जेवियर दुर्भाग्यशाली थे, उन्हें ओलंपिक में स्वर्ण पदक नहीं मिला।       जेवियर की पत्नी भी तैराक हैं, उन्होंने भी फ्रांस के लिए ओलंपिक में भाग लिया है। पर मैडल उनके भाग्य में भी नहीं। सम्भव है कि वे दुर्भाग्यशाली हों, या उनमें गोल्ड जीतने लायक प्रतिभा न हो।        एक ओलंपिक में जेवियर उस माइकल फेलेप्स के साथ भी तैरे थे, जो ओलंपिक का बादशाह है। जिसके पास सबसे अधिक पदक हैं। फेलेप्स के आगे तो उन्हें हारना ही था, वे हार गए।       जेवियर के मन मे वह हार बैठ गयी। वह हार उसे हमेशा दर्द देती रही, तड़पाती रही। पर करते क्या? उन्हें यह बात तो समझ आ गयी थी कि उनमें उतनी प्रतिभा नहीं जो ओलंपिक में अपना राष्ट्रगान बजवा सकें। जेवियर ने अपनी उम्मीदों को अपने बेटे में ढूंढना शुरू किया।       उनके लड़के में भी प्रतिभा थी। आखिर उसके माता-पिता ओलंपियन थे। जेवियर पति पत्नी अपने बच्चे के पीछे कड़ी मेहनत करने लगे। लड़क...

पापा की औकात

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 पाँच दिन की छूट्टियाँ बिता कर जब ससुराल पहुँची तो पति घर के सामने स्वागत में खड़े थे। अंदर प्रवेश किया तो छोटे से गैराज में चमचमाती गाड़ी खड़ी थी स्विफ्ट डिजायर! मैंने आँखों ही आँखों से पति से प्रश्न किया तो उन्होंने गाड़ी की चाबियाँ थमाकर कहा:-"कल से तुम इस गाड़ी में कॉलेज जाओगी प्रोफेसर साहिबा!" "ओह माय गॉड!!'' ख़ुशी इतनी थी कि मुँह से और कुछ निकला ही नही। बस जोश और भावावेश में मैंने तहसीलदार साहब को एक जोरदार झप्पी देदी और अमरबेल की तरह उनसे लिपट गई। उनका गिफ्ट देने का तरीका भी अजीब हुआ करता है। सब कुछ चुपचाप और अचानक!! खुद के पास पुरानी इंडिगो है और मेरे लिए और भी महंगी खरीद लाए। 6 साल की शादीशुदा जिंदगी में इस आदमी ने न जाने कितने गिफ्ट दिए। गिनती करती हूँ तो थक जाती हूँ। ईमानदार है रिश्वत नही लेते । मग़र खर्चीले इतने कि उधार के पैसे लाकर गिफ्ट खरीद लाते है। लम्बी सी झप्पी के बाद मैं अलग हुई तो गाडी का निरक्षण करने लगी। मेरा फसन्दीदा कलर था। बहुत सुंदर थी।  फिर नजर उस जगह गई जहाँ मेरी स्कूटी खड़ी रहती थी। हठात! वो जगह तो खाली थी।  "स्कूटी कहाँ है?" मैंने ...

Pity Life

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 In December 1937, during a football match at Stamford Bridge in London between Chelsea FC and Charlton FC, the game was abandoned in the 60th minute due to heavy fog.  Unfortunately, Charlton FC goalkeeper Sam Bartram was unaware that the match had been stopped and continued to guard his goal for another fifteen minutes. He did not hear the referee's whistle because of the noise from the crowd behind him. Believing that his teammates were attacking the opposing goal, he stood with outstretched arms, fully focused on protecting his goal amidst the dense fog. It was only fifteen minutes later when the field police approached him and informed him that the match had been abandoned fifteen minutes earlier. Sam Bartram, deeply saddened by this, famously said: " HOW SAD THAT MY FRIENDS FORGOT ME WHEN I WAS GUARDING THEIR GATE." Life's game is much like this. We diligently and supportively guard the goals of many around us, but when the situation becomes foggy, some may aba ...

दोगले रिश्ते

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  बेटी से बहु बनना आसान था पर अब बहु से बेटी नहीं बना जाता जिस ससुर से पर्दा किया उम्र भर बीमारी में उसका बदन नही छुआ जाता जिस सास के ताने सुन सुन उमर गुजरी  उसका गिरगिट रूप ना देखा जाता  खुद के बनाए कानून ही बिसरा दिए  लक्ष्मण रेखा भी स्वार्थों ने मिटा दी   बेटी ही थी, बहु तुमने ही बनाया था बहु बेटी का फर्क भी समझाया था जेठ, ससुर से पर्दा करवाया था मायके ससुराल का फ़र्क सिखाया था पर आज जब लाचार हो कहानी क्यों बदल गई बहु फिर बेटी कैसे बन गई सारी पर्दादारी ही हट गई उफ़ कैसे ये दोगले रिश्ते है जो स्वार्थ से टूटते,बनते हैं हम जैसे तो समझ कर भी   नहीं समझ सकते है

रेणु जी

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रेणु जी एक डिग्री कालेज की प्रिन्सिपल हैं। आज डिग्री कालेज में प्रतियोगिता है। हर साल रेणु जी प्रतियोगिता रखती है जो कि हर बार ही कुछ अलग होती है। इस साल भी किसी को नहीं पता कि प्रतियोगिता में क्या होने वाला है। मैदान बच्चों और अध्यापकों से खचाखच भरा हुआ है।  रेणु जी ने माइक पर आकर प्रतियोगिता के प्रारम्भ की घोषणा की। मैदान के एक छोर पर दस स्कूटी खड़ी कर दी गयी।  ’’आज होने वाली प्रतियोगिता में बच्चों के साथ साथ अध्यापक भी भाग ले सकते हैं। आपको ये स्कूटी चलाकर फिनिश लाइन तक ले जानी है, न तो खुद को चोट लगानी है और न ही किसी और को।’’ रेणु जी मुस्कुराते हुये माइक पर बोली।  कुछ लड़कियों ने तो मना कर दिया क्योंकि उन्हे स्कूटी चलानी ही नहीं आती थी। कुछ लड़कियों ने किसी प्रशिक्षित चालक की तरह स्कूटी फिनिश लाइन तक चुटकियों में पहुंचा दी। एक दो लड़कियाॅं नौसिखिया थी तो रास्ते में ही गिर गयी फिर भी उन्होने कोशिश की। कुछ लड़कियाॅं बड़ी सावधानी से पैर लटका कर ब्रेक मार मार कर फिनिश लाइन तक पहुंची जिसमें एक लड़की फिनिश लाइन में ब्रेक नहीं लगा पायी और सामने लगे पेड़ से जाकर टकरा गयी। अब लड़कों ...

चुप-चुप

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 आई .सी. यू.के दरवाज़े के बाहर खड़े लोगों का दुनिया से रिश्ता टूट जाता है । हॉस्पिटल के दरों दीवार, कम्पाउडर , नर्स , गार्ड ,डॉक्टर , कमरों के ऊपर लिखे विशेषज्ञ विभागों के नाम उनकी नई दुनिया है । दवाइयों की पर्ची, टेस्ट रिपोर्ट उनके नए अलंकार है ।  चारों तरफ व्हील चेयर , स्ट्रेचर के साथ-साथ चलते अपने जैसे ढेरों लोग। सूनी आँखों से डॉक्टर का इंतज़ार करते व्हीलचेयर पर बैठे है अपने ही पेशाब की थैली पकड़े लोग । नाक से निकले लम्बे पाइप से बेखबर  मुँह खोले शून्य में निहारतें दूसरी दुनिया के लोग । इस दुनिया में आने के बाद उनके नए नाम "पेशेंट" है । फिनाइल से गमकते गलियारों में रोबोट से आते जाते लोग । स्कूल के बाद यहाँ की दुनिया में फिर एक बार यूनिफार्म पहने लोग दिख रहे । दवाओं से गंधाती हवा में टहलते बेचैन लोग । किसी डॉक्टर ने चेक नही किया कि आक्सीजन मास्क लगे मरीज से ज्यादा तेज चल रही है बाहर खड़े लोगों की धड़कनें । लाखों का बिल जमा कर चाय के पैसे बचाने हॉस्पिटल के सामने की टपरी में 10 रुपये की चाय पीते लोग । डॉक्टरों के नाम  दो के पहाड़े की तरह याद है। महामृत्युंजय मंत्र उच्चारत...

कभी-कभी कुछ रिश्तों में

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 "कभी-कभी कुछ रिश्तों में " उन्हें ख़फ़ा हो फासलें बनाना और , मेरी गरज उन्हें कसकर थामना है .... .उन्हें मेरी खामियाँ सरेआम करना है , मुझे अपनी खताओं पर विचारना है मेरे हिस्से  सफाई देना , पछताना , मनाना , उदासी, अकेलापन, माफ़ीनामा, अपेक्षाओं का ऊँचा कटघरा है ..... उनके हिस्से नाराज़गी सवालों की फ़ेहरिश्त , फैसला , और हक़बाजी का एक-एक ककहरा है ...... मेरी झोली में  हुक्मरानी , दरख़्वास्त , सिफारिशें , जी हजूरी , इल्ज़ाम और उनकी दराज़ में खारिज़नामा है..... उनकी फितरत जज्बातों को  चूर चूर बिखेरना , तो मेरी आदत टुकड़ों को  चुन चुन समेटना है...... उनके पलड़े में तमगे ,  गुरुर , शिकायत है ।  मेरे दामन में  फिक्र ,  तन्हाई और  उनसे मिलने वाली  जमानत है .......

सार्वजनिक जीवन मे मर्यादा

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 सार्वजनिक जीवन में मर्यादा से रहें जिस प्रकार किसी को मनचाही स्पीड में गाड़ी चलाने का अधिकार नहीं है, क्योंकि रोड सार्वजनिक है। ठीक उसी प्रकार किसी भी लड़की को मनचाही अर्धनग्नता युक्त वस्त्र पहनने का अधिकार नहीं है क्योंकि जीवन सार्वजनिक है। एकांत रोड में स्पीड चलाओ, एकांत जगह में अर्द्धनग्न रहो। मगर सार्वजनिक जीवन में नियम मानने पड़ते हैं। भोजन जब स्वयं के पेट मे जा रहा हो तो केवल स्वयं की रुचि अनुसार बनेगा, लेकिन जब वह भोजन परिवार खायेगा तो सबकी रुचि व मान्यता देखनी पड़ेगी। लड़कियों का अर्धनग्न वस्त्र पहनने का मुद्दा उठाना उतना ही जरूरी है, जितना लड़को का शराब पीकर गाड़ी चलाने का मुद्दा उठाना जरूरी है। दोनों में एक्सीडेंट होगा ही।  अपनी इच्छा केवल घर की चहारदीवारी में उचित है। घर से बाहर सार्वजनिक जीवन मे कदम रखते ही सामाजिक मर्यादा लड़का हो या लड़की उसे रखनी ही होगी।  घूंघट और बुर्का जितना गलत है, उतना ही गलत अर्धनग्नता युक्त वस्त्र गलत है। बड़ी उम्र की लड़कियों का बच्चों की सी फ़टी निक्कर पहनकर छोटी टॉप पहनकर फैशन के नाम पर घूमना भारतीय संस्कृति का अंग नहीं है। जीवन भी गिटार या ...