दोगले रिश्ते

 



बेटी से बहु बनना आसान था

पर अब बहु से बेटी नहीं बना जाता

जिस ससुर से पर्दा किया उम्र भर

बीमारी में उसका बदन नही छुआ जाता


जिस सास के ताने सुन सुन उमर गुजरी

 उसका गिरगिट रूप ना देखा जाता

 खुद के बनाए कानून ही बिसरा दिए

 लक्ष्मण रेखा भी स्वार्थों ने मिटा दी

 

बेटी ही थी, बहु तुमने ही बनाया था

बहु बेटी का फर्क भी समझाया था

जेठ, ससुर से पर्दा करवाया था

मायके ससुराल का फ़र्क सिखाया था


पर आज जब लाचार हो

कहानी क्यों बदल गई

बहु फिर बेटी कैसे बन गई

सारी पर्दादारी ही हट गई


उफ़ कैसे ये दोगले रिश्ते है

जो स्वार्थ से टूटते,बनते हैं

हम जैसे तो समझ कर भी

  नहीं समझ सकते है

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