चुप-चुप

 आई .सी. यू.के दरवाज़े के बाहर खड़े लोगों का दुनिया से रिश्ता टूट जाता है ।

हॉस्पिटल के दरों दीवार, कम्पाउडर , नर्स , गार्ड ,डॉक्टर ,

कमरों के ऊपर लिखे विशेषज्ञ विभागों के नाम उनकी नई दुनिया है ।

दवाइयों की पर्ची, टेस्ट रिपोर्ट उनके

नए अलंकार है ।

 चारों तरफ व्हील चेयर , स्ट्रेचर के साथ-साथ चलते

अपने जैसे ढेरों लोग।


सूनी आँखों से डॉक्टर का इंतज़ार करते व्हीलचेयर पर बैठे है अपने ही पेशाब की थैली पकड़े लोग ।

नाक से निकले लम्बे पाइप से बेखबर 

मुँह खोले शून्य में निहारतें दूसरी दुनिया के लोग ।

इस दुनिया में आने के बाद उनके नए नाम "पेशेंट" है ।

फिनाइल से गमकते गलियारों में रोबोट से आते जाते लोग ।

स्कूल के बाद यहाँ की दुनिया में फिर एक बार यूनिफार्म पहने लोग दिख रहे ।


दवाओं से गंधाती हवा में टहलते बेचैन लोग ।

किसी डॉक्टर ने चेक नही किया कि

आक्सीजन मास्क लगे मरीज से ज्यादा तेज चल रही है बाहर खड़े लोगों की धड़कनें ।

लाखों का बिल जमा कर चाय के पैसे बचाने हॉस्पिटल के सामने की टपरी में 10 रुपये की चाय पीते लोग ।

डॉक्टरों के नाम 

दो के पहाड़े की तरह याद है।

महामृत्युंजय मंत्र उच्चारते हाईजैक हुए लोग ।


एक जान की कीमत क्या है ?

आईसीयू के बिस्तर पर लेटा है जो,

कुछ लोगों की दुनिया है वो । 

जान की बस इतनी कीमत है ।


आई.सी.यू.के बाहर खड़े लोग ,

मेमने से ज्यादा सहमे हुए है ।

फैमिली व्हाटऐप्स ग्रुप से कोई

हमेशा के लिए 

लेफ्ट होने की तैयारी में है ।

आप जब इसे पढ़ रहे है

 ठीक इसी वक्त अभी भी

आपके शहर में एक ख़ौफ़ज़दा दुनिया आई .सी .यू .के बाहर 

कराह रही है चुप-चुप



Comments

Popular posts from this blog

मेरे बेटे

नया युग(कविता)

"कच्ची नीम की निम्बौरी सावन जल्दी अईयो रे.........''