हम आपको ज़बरदस्ती रंग नहीं लगाएंगे

 ये कौन से देवर-भाभी हैं 

जिनके बीच में अवैध संबंध हैं?


अखबारों में 

न्यूज़ पर 

यू ट्यूब पर 

इंस्टाग्राम पर किन देवरों और भाभियों की वीडियोज़ हैं?


जिन्हें चटखारे लेकर देखते हैं 

हमारे घरों के 

छोटे-छोटे बच्चे 


स्खलित हो जाते हैं 

आयु से पहले ही 


इतने उत्तेजित हो जाते हैं 

कि टूट पड़ते हैं सगी बहनों पर! 


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कितनी रंगीन थीं हमारी होलियाँ 


देवर रंग लेकर भागते थे 

भाभियों के पीछे 


भाभियाँ छुप जाती थीं 


नहानघरों में 

कमरों में 

रसोइयों में 


हम खिड़की की जाली के भीतर से फेंक देते थे 

पानी में घुला हुआ कोढ़िया रंग 


घर के बुजुर्ग डांटते थे हमें 


वही रंगी हुई भाभियाँ 

परोसती थीं हमें 

गुझिया, भुजिया, चाय और शरबत  


कहाँ गए वे देवर? 


क्या वे देवर आज भी कहीं-कहीं मौजूद हैं? 


---


भाभियाँ जानती थीं 

देवरों ने शराब पी रखी है 

या गांजा 

या भांग 

या अफीम 

या डोडा 

या अमल 


लेकिन भाभियों को भरोसा था देवरों पर 


देवर 

गाल रंग देते थे 

पीठ रंग देते थे 

पेट रंग देते थे 


लेकिन स्तनों पर हाथ न जाता था देवरों का 


हालांकि भाभियों की रंगीन चोलियाँ 

होली के पानी में भीग कर 

इतनी पारदर्शी हो जाती थी 

कि भैयाओं का मन होता था 

अकेले में भाभियों के साथ होली खेलने का! 


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कौन देखता है 

इतनी अश्लील वीडियोज़ 

कौनसे कारखाने हैं 

जिनमें वीडियोज़ के कैप्शन बनते हैं : 


"देवर ने भाभी को चूसा" 

"देवर ने लिए भाभी के मज़े" 

"देवर ने उठाया भाई के फ़ौज में होने का फ़ायदा" 

"देवर भाभी होट वीडियो" 

"देवर और भाभी रात को रंगे हाथ पकड़े गए" 


कौन हैं यह नए दर्शक 

कहाँ गए वे बूढ़े-बूढियां 

जो सेंसर बोर्ड की तरह घर की दहलीज़ पर बैठे 

हमारी निगरानी करते रहते थे 


क्या वे सब वृद्धाश्रम चले गए?


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उम्र में बराबर के होकर भी 

देवर खाते थे भाभियों के धोक 


देवर-भाभी के लिए कहा जाता था 

यह तो माँ-बेटे जैसा रिश्ता है 


इन दिनों तो 

अगर देवर-भाभी घर पर अकेले हों

तो धड़कन बढ़ जाती है बड़े भाई की : 


किसी के भीतर नहीं बची निर्दोषिता 

एक कलुष चढ़ आया है 

सभ्यता के चेचक भरे गेहुँए चेहरे पर 


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पास में है होली 

मैं रहूंगा ही किसी नशे में 

पड़ोस की भाभियाँ तक आएँगी रंग लगाने 

लेकिन पहले उनके पैरों पर डालूंगा रंग 


देह को बीच में नहीं आने दूंगा 

हालांकि रंग देह पर ही चढ़ेगा 


सब कुछ रंग दूंगा भाभियों का 

बाल्टी से नहला दूंगा 

पारदर्शी भाभियों से मिलाऊँगा नज़र

लेकिन उन्हें अपनी पलकों का पर्दा भी दूंगा 


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मेरे बच्चो! 


हमेशा से लगता आया है 

पुराना ज़माना अच्छा 

हालांकि पहले कुंठाओं के रूप दूसरे थे 

संसाधन थे कम बहुत कम 


लेकिन मैं 

एक ऐसा कवि बनना चाहता हूँ 

जो देवरों और भाभियों को आपस जोड़ दे 


भाभियों के गालों पर 

रंग लगाना 

एक कला है मेरे बच्चो


बिना हाथ लगाए लगाना होता है हाथ 

बिना छुए भिगोनी होती है चोलियां 

उनके साथ नाचना होता है बिना उनपर हावी हुए 


भाभियों के साथ जब भी नाचो 

तो मेरे बच्चो 


भैयाओं को आगे कर दो - 


उन्हीं का पहला हक़ है 

भीगी हुई अजंता ऐलौरा की मूरत को 

सर से पाँव तक 

रंगने और निहारने का! 


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इस अखबार को 

इस न्यूज़ चैनल को 

इस यू ट्यूब को

इस इंस्टाग्राम को 


होलिका दहन के हवाले कर दो बच्चो - 


उस प्रह्लाद को बचा लो 

जिसके पास 

अब नहीं जलने का वरदान नहीं रह गया है! 


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प्रातःस्मरणीय भाभियो! 


हम देवरों से डरो मत 

हम आपको 

वहीं रंग लगाएंगे 

जहाँ आप लगवाएंगी 


हम आपको ज़बरदस्ती रंग नहीं लगाएंगे


!!!


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