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Showing posts from June, 2026

मजदूर बिरादरी मन ही मन खुद को मालिक से ज्यादा बुद्धिमान समझती है .

 इस देश का गरीब 70 % से ज्यादा चालबाज, धूर्त,झूठा बहानेखोर और मुफ्तखोर और दारूबाज है।जो 30 % सही है वो मेहनत करते है,ईमानदारी से धीरे धीरे बढ़ते है और एक आध पीढ़ी के बाद गरीबी से निकलकर मिडल क्लास में प्रेवश कर देते है।आपने देखा भी होगा अपने आसपास कैसे ना कैसे बच्चे पढ़ाये और फिर सब जॉब लगे और आज जो गरीब था वो खुश है लेकिन जो किसी के पैसे मारते थे,झूठ बोलते थे।मक्कारी करते थे वो वही है आज भी 100 ,200 रुपये मांगते है। मैंने मेरी सोसायटी में कचरे वाले को 500 रुपये अलग से दिये कि भाई तेरी वाइफ पीछे कचरा बीनती है उसके हाथ मे कुछ लग जायेगा। उसके लिए कुछ गलाउज ले लेना और कुछ मास्क । खत्म हो जाये तो बोलना मैं फिर दे दूंगा। कुछ दिन बाद उसकी वाइफ को बिना गलाउज के देखा और पूछा तो बोली साहब ये दारू पी गया। 15 से 20 हजार की नोकरी वाले अपने मालिक से एक सॅलरी एडवांस में हमेशा उधार मांग के रखेंगे और मांगते ही रहेंगे और अगला जैसे ही मांगेगा जॉब चेंज कर देंगे। ट्रांसपोर्ट वाले के ट्रक को बीच मे छोड़कर चले जायेंगे या पीकर ठोक देंगे। उसमे गन्दा डीजल भरके ,अपने 200 रुपये के लिये उसके 40 लाख की ऐसी तैसी क...

मोहनजोदड़ो

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 एक लड़की अचानक ऐसी भाषा बोलने लगी जो हजारों साल पुरानी थी 1. वो मंगलवार 12 अगस्त 2025। सावन का महीना।  वाराणसी के अस्सी घाट के पास, गली में रहने वाला तिवारी परिवार। पंडित शंभू तिवारी, 50 साल, संस्कृत के टीचर। पत्नी उमा, 46 साल, गृहिणी। बेटी अनन्या, 17 साल, 12वीं में थी। सीधी-सादी, टॉप करने वाली लड़की। भरतनाट्यम सीखती थी।  मंगलवार की सुबह 6 बजे अनन्या रोज़ की तरह रियाज़ कर रही थी। माँ ने चाय के लिए आवाज़ दी। "अनन्या बेटा, नीचे आ जा।" अनन्या सीढ़ियों से उतरी। पर चेहरा बदला हुआ था। आँखें लाल। होंठ सूखे।  उमा ने पूछा, "क्या हुआ बेटा? तबियत ठीक नहीं?" अनन्या ने उमा को देखा। और बोलना शुरू किया।  पर वो आवाज़ अनन्या की नहीं थी। भारी, गूँजती हुई। और भाषा हिंदी नहीं थी। संस्कृत भी नहीं। कोई और।  "अहम् जागृतास्मि। कः कालः? कुत्र अस्मि?" उमा के हाथ से चाय गिर गई। "हे भगवान! ये क्या बोल रही है?" शंभू भागे आए। संस्कृत के प्रोफेसर थे। पर ये संस्कृत नहीं थी। कुछ शब्द मिलते जुलते थे, पर व्याकरण अलग। उच्चारण अलग।  अनन्या लगातार बोल रही थी। आँखें बंद। हाथ की मुद्र...

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी 1955

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 मेरे पिताजी 1955 के आसपास इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे तो बच्चन जी और फ़िराक़ साहब उन्हें अंग्रेजी पढ़ाते थे,उस समय छात्र बड़े आसानी से अपने टीचर के घर जाते थे,पिताजी बताते थे फिराक साहब अकेले रहते थे घर में उनके कोई परिवार के लोग और काम करने वाले रहते थे,फिराक साहब बड़ी शान से रहते थे छात्रों को बटर टोस्ट खिलाते और कॉफी पिलाते थे, फ़िराक़ साहब ही अकेले ऐसे आदमी थे जो नेहरू को हमेशा जवाहर कहते थे, उस समय पृथ्वीराज कपूर भी अपने दो नाटक पैसा और पठान लेकर इलाहाबाद आए थे,तब इलाहाबाद की छात्र यूनियन के सदस्य पृथ्वीराज से मिलने गए थे,मेरे पिताजी भी गए थे,वो लोग यूनियन के लिए एक चैरिटी शो करवाना चाहते थे, पृथ्वीराज ने मना कर दिया,बोले उन्होंने अपने दो हिट नाटकों पर आधारित दो फिल्म बनाई जिसमें उनका पैसा डूब गया,दोनों फिल्में फ्लॉप रही उन फिल्मों के लिए उन्होंने अपने बेटे राज से दो लाख रुपए उधार किया था,वो बोल रहे थे कि वो अपने बेटे का कर्ज लेकर मरना नहीं चाहते,इसीलिए फिर से अपने पृथ्वी थिएटर को लेकर देश में घूम रहे थे ताकि अपने बेटे का कर्ज चुकता कर सकें, बच्चन जी सिविल लाइंस में र...

प्रधानमंत्री के बेटे

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 इस देश में जाने कितने लोग होंगे जो वेश्याओं के पास जाते हैं और दिन के उजाले में सफेदपोश बने रहते हैं। प्रधानमंत्री से लेकर आम नागरिक तक का जाने कितनी महिलाओं से सबंन्ध रहा होगा लेकिन सबके सामने स्वीकारने का साहस उन्हें नही होता। सम्बन्ध बनाने में इस देश में लोग रिश्तों की मर्यादा तक भूल जाते हैं।  गांव,शहर, स्कूल कॉलेज-यूनिवर्सिटी में प्रेमी जोड़े होते हैं लेकिन उनमें केवल 10 प्रतिशत ही साहस कर पाते हैं सबके सामने एक दूसरे का हाथ थामने का। 90 प्रतिशत लोग पापा नही मांनेगे,हमारी जाति अलग है,धर्म अलग है,पापा को दहेज चाहिए बोलकर किनारा कर लेते हैं। एक लड़का कैम्ब्रिज जाता है। वहां की यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स अपना खर्च चलाने के लिए खुद काम करते हैं। वो काम रेस्टोरेंट में वेटर का हो या पेट्रोल पंप में पेट्रोल भरने का। वो स्टूडेंट्स अमीर घर के हो या गरीब अपना खर्च खुद चलाने के लिए काम करते हैं।  ऐसे ही एक लड़का रेस्टोरेंट में जाता है और एक खूबसूरत लड़की से उसकी नजर मिलती है जो उसके साथ ही पढ़ती है और अपना खर्च चलाने के लिए उसी रेस्टोरेंट में काम करती है। लड़के को लड़की की ...