पत्थर दिल
"सामने बेटे की मौ*त खड़ी थी और हाथ में उसे बचाने का मौका, पर इस बाप ने जो फैसला लिया उसे सुनकर दुनिया के पैरों तले जमीन खिसक गई! क्या कोई इतना पत्थर दिल
हो सकता है?"
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान रूस के तानाशाह स्टालिन का बड़ा बेटा, याकोव (Yakov), जर्मन सेना द्वारा पकड़ लिया गया था। हिटलर को लगा कि यह स्टालिन को झुकाने का सबसे सही मौका है। जर्मनी ने एक प्रस्ताव भेजा— "अपने बेटे याकोव को वापस ले लो और बदले में हमारे पकड़े गए फील्ड मार्शल फ्रेडरिक पॉलस (Friedrich Paulus) को रिहा कर दो।"
दुनिया को लगा कि एक पिता अपने बेटे को बचाने के लिए कुछ भी करेगा।
एक बाप के लिए भी यह मौका था अपने बेटे की जान बचाने का, लेकिन स्टालिन ने जो कहा वह आज भी इतिहास में दर्ज है। उन्होंने जवाब दिया
"मैं एक फील्ड मार्शल का सौदा एक साधारण सिपाही से नहीं कर सकता।"
स्टालिन की नज़र में याकोव सिर्फ उनका बेटा नहीं, बल्कि रेड आर्मी का एक लेफ्टिनेंट था। उनके लिए लाखों रूसी सैनिकों की जान उनके अपने बेटे से बढ़कर थी। नतीजा यह हुआ कि याकोव की जेल में ही मृ*त्यु हो गई, लेकिन स्टालिन ने अपने सगे बेटे को बचाने के लिए देश के उसूलों से समझौता नहीं किया। बाद में उनके बेटे याकोव की जेल में ही मौत हो गई।
कहा जाता है कि जब याकोव की मौ*त की खबर स्टालिन तक पहुँची, तो वह 'आयरन मैन' अंदर से टूट गया था। वे घंटों तक अपने कमरे में अकेले बैठे रहे, किसी से कोई बात नहीं की। वह एक ऐसे पिता का मौन था जिसने देश के लिए अपने कलेजे के टुकड़े को कुर्बान कर दिया था।
अक्सर बड़े नेताओं की मौत के बाद अकूत संपत्ति के किस्से सामने आते हैं, लेकिन स्टालिन का मामला बिल्कुल अलग था। 1953 में जब उनकी मृत्यु हुई और उनके निजी सामान की लिस्ट बनाई गई, तो सोवियत संघ जैसा विशाल साम्राज्य चलाने वाले व्यक्ति के पास से सिर्फ यह मिला:
कुछ पुरानी वर्दियाँ (Uniforms)
घिसे हुए जूते
उनका पसंदीदा पाइप
और ढेरों किताबें।
उनके पास न कोई निजी बंगला था, न विदेशी बैंक खाते और न ही सोना-चांदी। इतने ताकतवर पद पर होने के बावजूद उनकी निजी संपत्ति एक साधारण क्लर्क से भी कम थी।
स्टालिन के शासन को लेकर दुनिया के अलग-अलग मत हो सकते हैं, लेकिन उनके इस त्याग और सादगी को नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने साबित किया कि विचारधारा और देश के नियम सबके लिए एक समान होने चाहिए|

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