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Showing posts from July, 2026

हम जिसे Strong करना हो,उसे आलसी बना दो

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 आपके धंधे आपकी कमाई को सबसे बुरी नजर लगती है आलस की, आप जो भी कर रहे है, अगर आप उस काम में जरा सा भी आलसी हुए,खेल खत्म। चाहे आप बड़ी कंपनी चला रहे हो, देश चला रहे हो या फिर कोई छोटी रेहड़ी। ये भाई सड़क किनारे बिरयानी बेचते है, आप जब भी जायेंगे हमेशा गर्म बिरयानी मिलेगी, एक देग खाली होता रहता है तो दूसरे देग की तैयारी चलती रहती है उसी टाइम में,जब तक पहला देग खाली होगा, तब तक दूसरा देग तैयार। चार या पांच साल में ये इंसान कही किसी बढ़िया दुकान में शिफ्ट हो लेगा,और इसके आस पास के ठेले वालो की पीढ़िया इसी सड़क पर जीवन गुजार देंगी,और मै ऐसा गुस्सा या बददुआ कि नीयत से नहीं कह रहा हू, कारण है। सबसे पहले समझते है कि ये बिरयानी वाला क्यू आगे बढ़ेगा अपनी जिंदगी में,सबसे बड़ी वजह ये है,बंदा आलस नहीं करता है। कभी कभी कुछ देर के लिए जब दुकानदार शांत होती है,तो ये अपने ही देग की बिरयानी लेकर बैठ जाता है,खाता नहीं टेस्ट करता है। फिर चटनी, रायता धीरे धीरे सबका नंबर आता है।रायता या चटनी कोई खास नहीं है इसकी,मतलब ठीक ठाक ही, मजेदार जो है वो है इस भाई कर परोसने का तरीका।क्योंकि भाई बस दुकानदारी शांत ...

ढाई हजार साल पुरानी कही बात जो आज बेहद प्रासंगिक है

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 महान दार्शनिक कन्फ्यूशियस ने कहा था- "बुढ़ापे में अपनी जवान औलाद के बहुत ज़्यादा करीब रहने की कोशिश, कई बार उन्हें आपसे दूर कर देती है।" यह वाक्य सुनने में कठोर लग सकता है, लेकिन जीवन के लंबे अनुभवों से छनकर निकला एक गहरा सत्य है। कहानी है ली वेई नाम के एक वृद्ध व्यक्ति की। उसने अपना पूरा जीवन अपने बच्चों के लिए समर्पित कर दिया। दिन-रात मेहनत की, अपनी इच्छाओं को पीछे रखा, अपने सपनों को छोटा किया ताकि बच्चों के सपने बड़े हो सकें। जब बच्चे अपने पैरों पर खड़े हो गए, अपने परिवार और जिम्मेदारियों में व्यस्त हो गए, तो ली वेई ने सोचा कि अब जीवन की संध्या उनके बीच प्रेम और अपनत्व में बीतेगी। उसने अपना घर बेच दिया और बेटे के साथ रहने चला गया। लेकिन धीरे-धीरे उसे महसूस होने लगा कि भरे हुए घर में भी उसके हिस्से का एकांत बढ़ता जा रहा है। बच्चे अपने काम में व्यस्त थे, बहू अपनी जिम्मेदारियों में, पोते-पोतियाँ अपनी दुनिया में। उसकी बातें आधी सुनी जातीं, उसके सुझाव अनचाही सलाह लगने लगे और उसकी उपस्थिति धीरे-धीरे एक आवश्यकता से अधिक एक अतिरिक्त जिम्मेदारी जैसी महसूस होने लगी। वह जितना निकट आ...