मेरी माँ
मेरी माँ
!!!!!!!!!!!!!!
लेती नही दवाई " माँ "
जोडे पाई पाई " माँ " ।
दुख थे पर्वत , राई " माँ "
हारी नही लड़ाई "माँ "।
इस दुनिया में सब मैले हैं ,
किस दुनिया से आई "माँ"।
दुनिया के सब रिश्ते ठंडे ,
गरमागर्म रजाई " माँ "।
जब भी कोई रिश्ता उधड़े ,
करती हैं तुरपाई " माँ " ।
बाबूजी के पांव दबा कर ,
सब तीरथ हो आई " माँ "।
नाम सभी हैं गुड़ से मिठे ,
माँ जी , मैया , माई " माँ "।
सभी साड़ियाँ छीज गई थी ,
मगर नही कह पाई " माँ "।
घर में चूल्हे मत बाँटों रे ,
देती रही दुहाई " माँ " ।
बाबूजी बीमार पडे जब ,
साथ साथ मुरझाई " माँ " ।
रोती हैं लेकिन छुप छुप कर ,
बड़े सब्र की आई " माँ "।
लड़ते लड़ते , सहते सहते ,
रह गई एक तिहाई " माँ " ।
बेटी रहे ससुराल में खुश ,
सब जेवर दे आई " माँ "।
" माँ " से घर , घर लगता हैं ,
घर में घुली समाई " माँ " ।
बेटे की कुर्सी हैं ऊँची ,
पर उसकी ऊँचाई " माँ "।
दर्द बड़ा हो या छोटा हो ,
याद हमेशा आई " माँ "।
घर के शगुन सभी " माँ " से ,
हैं घर की शहनाई " माँ "।
सभी पराये हो जाते हैं ,
होती नही पराई !! " माँ "
मेरी प्यारी माँ "पदम "
आप की बेटl
!!!!!!!!!!!!!!
लेती नही दवाई " माँ "
जोडे पाई पाई " माँ " ।
दुख थे पर्वत , राई " माँ "
हारी नही लड़ाई "माँ "।
इस दुनिया में सब मैले हैं ,
किस दुनिया से आई "माँ"।
दुनिया के सब रिश्ते ठंडे ,
गरमागर्म रजाई " माँ "।
जब भी कोई रिश्ता उधड़े ,
करती हैं तुरपाई " माँ " ।
बाबूजी के पांव दबा कर ,
सब तीरथ हो आई " माँ "।
नाम सभी हैं गुड़ से मिठे ,
माँ जी , मैया , माई " माँ "।
सभी साड़ियाँ छीज गई थी ,
मगर नही कह पाई " माँ "।
घर में चूल्हे मत बाँटों रे ,
देती रही दुहाई " माँ " ।
बाबूजी बीमार पडे जब ,
साथ साथ मुरझाई " माँ " ।
रोती हैं लेकिन छुप छुप कर ,
बड़े सब्र की आई " माँ "।
लड़ते लड़ते , सहते सहते ,
रह गई एक तिहाई " माँ " ।
बेटी रहे ससुराल में खुश ,
सब जेवर दे आई " माँ "।
" माँ " से घर , घर लगता हैं ,
घर में घुली समाई " माँ " ।
बेटे की कुर्सी हैं ऊँची ,
पर उसकी ऊँचाई " माँ "।
दर्द बड़ा हो या छोटा हो ,
याद हमेशा आई " माँ "।
घर के शगुन सभी " माँ " से ,
हैं घर की शहनाई " माँ "।
सभी पराये हो जाते हैं ,
होती नही पराई !! " माँ "
मेरी प्यारी माँ "पदम "
आप की बेटl
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