लघुकथा--बेटी का बाप
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गुप्ता जी ने जैसी ही पंडाल में अपने बेटे को कई लोगों के साथ बहस करते देखा तो दौड़कर पंडाल की तरफ भागे।
"क्या हुआ बेटा सोनू, शोर क्यों मचा रहा है?" गुप्ता जी ने बड़े हैरानी से अपने बेटे से पूछा।
"देखिये ना पिताजी, मुझे कोल्ड ड्रिंक पीना है और ये लड़की वाले कह रहे हैं कि कोल्ड ड्रिंक खत्म हो गया।"
सोनू ने गुस्से भरे स्वर में जवाब दिया।
गुप्ता जी अपने बेटे को समझा ही रहे थे कि इतने में बेटी का बाप आ पहुँचा और हाथ जोड़कर बोला।
"माफ करना बेटा, कोल्ड ड्रिंक खत्म हो गयी है, लेने के लिए भेजा है। अभी थोड़ी देर में आ जायेगी।"
गुप्ता जी से रहा नहीं गया। उन्होंने तुरंत उनका हाथ पकड़कर बोला। "रहने दीजिए समधी जी। शादी में कम ज्यादा होता रहता है। आपको कोल्ड ड्रिंक मंगाने की कोई जरूरत नहीं है। मैंने भी पिछले वर्ष अपनी बिटिया की शादी की थी। मैं समझ सकता हूँ। मैं भी एक बेटी का बाप हूँ।"
अग्रवाल जी अपने आँसू नहीं रोक पा रहे थे। सोनू शर्मिदा होकर वहाँ से चला गया।
गुप्ता जी ने जैसी ही पंडाल में अपने बेटे को कई लोगों के साथ बहस करते देखा तो दौड़कर पंडाल की तरफ भागे।
"क्या हुआ बेटा सोनू, शोर क्यों मचा रहा है?" गुप्ता जी ने बड़े हैरानी से अपने बेटे से पूछा।
"देखिये ना पिताजी, मुझे कोल्ड ड्रिंक पीना है और ये लड़की वाले कह रहे हैं कि कोल्ड ड्रिंक खत्म हो गया।"
सोनू ने गुस्से भरे स्वर में जवाब दिया।
गुप्ता जी अपने बेटे को समझा ही रहे थे कि इतने में बेटी का बाप आ पहुँचा और हाथ जोड़कर बोला।
"माफ करना बेटा, कोल्ड ड्रिंक खत्म हो गयी है, लेने के लिए भेजा है। अभी थोड़ी देर में आ जायेगी।"
गुप्ता जी से रहा नहीं गया। उन्होंने तुरंत उनका हाथ पकड़कर बोला। "रहने दीजिए समधी जी। शादी में कम ज्यादा होता रहता है। आपको कोल्ड ड्रिंक मंगाने की कोई जरूरत नहीं है। मैंने भी पिछले वर्ष अपनी बिटिया की शादी की थी। मैं समझ सकता हूँ। मैं भी एक बेटी का बाप हूँ।"
अग्रवाल जी अपने आँसू नहीं रोक पा रहे थे। सोनू शर्मिदा होकर वहाँ से चला गया।
Bahut badiya
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