बेटियां

  


घुंघराले बालों वाली सीधे,

और सीधे बालों वाली 

उन्हें घुंघराला करवाती हैं,

लंबे बालों वाली ब्वायकट

और ब्वायकट वाली 

नकली चोटी लगाती है!

ये लड़कियां भी न जाने 

क्या ऊधम मचाती हैं ?


साड़ी बाँधती हैं मम्मी की , 

ऊपर भाई की टीशर्ट 

पहन इठलाती हैं,

कभी हाई हील की सैंडिल 

तो कभी स्पोर्टशूज़ पहन

कदम बढ़ाती हैं,

ये लड़कियां भी न जाने 

क्या ऊधम मचाती हैं!


लिपस्टिक लगाती हैं

छिप छिप कर,

कभी चश्मा पहन,

हाथ नचाती हैं!

कलाई पर घड़ी बांध,

कभी हाथ में छड़ी ले

टीचर बन जाती हैं !

ये लड़कियां भी न जाने

क्या क्या ऊधम मचाती हैं!


घर-घर में कभी पापा बन,

अखबार के पन्ने उलटाती हैं!

और कभी अम्मा बन 

सब पर हुकुम चलाती हैं!

गुड्डे-गुड़िया की शादी कर

मुहल्ले में बताशे 

बंटवाती है!

ये लड़कियां भी न जाने 

क्या क्या ऊधम मचाती हैं!


चाकलेट, टाफी हुए पुराने

अब खुद ही ओरियो शेक बनाती हैं!

घर में तितली बन कर उड़ती,

एक दिन चिड़िया बन उड़ जाती हैं !

याद आती है बस तब इनकी

बेटियां घर क्यों छोड़ जाती हैं ?


Comments

Popular posts from this blog

मेरे बेटे

नया युग(कविता)

"कच्ची नीम की निम्बौरी सावन जल्दी अईयो रे.........''