हम आप तो तमाशा देखने वाले हैं ही!

 पद्मविभूषण छन्नू लाल मिश्र का परिवार लड़ मरा कि अंतिम संस्कार का पैसा कौन दे। तेरहवीं कौन कराए। कुल 25 हजार के भुगतान के लिए भाई बहन एक दूसरे का माथा फोड़ रहेसोचिए पीएम, सीएम से लेकर सोशल मीडिया पर बड़े बड़े पत्रकार छन्नूलाल मिश्र पर अपने संबंधों और उनकी तारीफ़ के ढोल पीट रहे थे. यह समाज कितना खोखला है कि अंतिम संस्कार के 25000 रूपये तक की व्यवस्था नहीं कर पाया. तेरहवीं का ख़र्चा कौन करे के लिए बेटा बेटी लड़ रहे हैं. इससे क्या सीख मिल रही है बच्चों को पारिवारिक मूल्य समझाओ यह मत बताओ कि पड़ोसी या फुआ और मौसा का बेटा इतना कमा रहा है. बच्चों को कामयाब और पारिवारिक संस्कार दो।


1. तुष्टिकरण की आदत के बाद विक्टिम कार्ड निश्चित है!


2. मेरी बेटी बेटे से कम है क्या ऐसा बोलकर बेटे को इग्नोर करना।

3. दहेज भी बेटे से त्याग कर दिलवाना और अपनी कमाई बेटी को बीच बीच में एक्सपोर्ट करना।

5. बेटे और बेटी को संस्कार दे दिए पर अगर बहु और दामाद कुसंस्कारी मिल गया तो आप क्या करेंगे।

6. मरते मरते बेटा बेटी के बीच उत्पन्न खाई को विरासत के रूप में छोड़कर जाना।

सबका परिणाम यही होना है बाकी हम आप तो तमाशा देखने वाले हैं ही!


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