प्रधानमंत्री के बेटे

 इस देश में जाने कितने लोग होंगे जो वेश्याओं के पास जाते हैं और दिन के उजाले में सफेदपोश बने रहते हैं। प्रधानमंत्री से लेकर आम नागरिक तक का जाने कितनी महिलाओं से सबंन्ध रहा होगा लेकिन सबके सामने स्वीकारने का साहस उन्हें नही होता। सम्बन्ध बनाने में इस देश में लोग रिश्तों की मर्यादा तक भूल जाते हैं। 


गांव,शहर, स्कूल कॉलेज-यूनिवर्सिटी में प्रेमी जोड़े होते हैं लेकिन उनमें केवल 10 प्रतिशत ही साहस कर पाते हैं सबके सामने एक दूसरे का हाथ थामने का। 90 प्रतिशत लोग पापा नही मांनेगे,हमारी जाति अलग है,धर्म अलग है,पापा को दहेज चाहिए बोलकर किनारा कर लेते हैं।


एक लड़का कैम्ब्रिज जाता है। वहां की यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स अपना खर्च चलाने के लिए खुद काम करते हैं। वो काम रेस्टोरेंट में वेटर का हो या पेट्रोल पंप में पेट्रोल भरने का। वो स्टूडेंट्स अमीर घर के हो या गरीब अपना खर्च खुद चलाने के लिए काम करते हैं। 


ऐसे ही एक लड़का रेस्टोरेंट में जाता है और एक खूबसूरत लड़की से उसकी नजर मिलती है जो उसके साथ ही पढ़ती है और अपना खर्च चलाने के लिए उसी रेस्टोरेंट में काम करती है।

लड़के को लड़की की खूबसूरती और समझदारी पसन्द आती है लड़की को लड़के की सौम्यता । दोनो में प्यार होता है। लड़की का बाप अमीर कांट्रेक्टर था और नही चाहता था कि उसकी बेटी विदेश में शादी करे। लड़के ने अपनी मां को अपनी पसन्द बता दी थी और उसकी मां शादी के लिए राजी थी। 


लड़के के पिता ने शर्त रखी कि एक साल तुम अपने घर रहो और इसके बाद भी तुम्हें लगता है कि तुम्हे वही लड़का चाहिए तो तुम उससे शादी कर सकती हो । बाप को लगा लड़की एक साल में लड़के को भूल जाएगी लेकिन ऐसा हुआ नही लड़की ने उसी से शादी करने का मन बनाया। 


दोनो की शादी हुई लड़की अपना देश छोड़कर विदेश आ गयी। लड़की वेस्टर्न कल्चर में पली थी उसने भारतीय संस्कार सीखे उसे सिखाया एक बड़े कवि की पत्नी ने। शादी के बाद से सार्वजिनक जीवन मे  उसके सिर से पल्लू  नही गया।


जैसे हर सुंदर प्रेम कहानी का अंत दुखद होता है वैसे ही इसका भी हुआ। इस खुशहाल जीवन को राजनीति की नजर लग गयी और दो बच्चों को मां के भरोसे छोड़कर लड़का इस दुनिया से विदा हो गया।

जाने कितने सपने आंखों में ही रह गए। बिताए हुए सुंदर पलो को गुजरे ज्यादा दिन नही हुए कि उस मेहंदी लगे हाथो में पहले सास का गोलियों से छलनी शरीर आया फिर पति की लाश टुकड़ों में मिली।


वो लड़की राजनीति में आना नही चाहती थी लेकिन राजनीति ने उसे अपनी तरफ खींच लिया क्योकि प्रधानमंत्री की पत्नी होने की अपनी  विडम्बना भी होती है।  लड़की ने कहा मुझे राजीव को लौटा दो मैं अपने देश वापस चली जाऊंगी लेकिन जाने वाले कहाँ लौटकर आते हैं।  उसने राजीव की विरासत को संभाल अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दिए। जिस देश मे पुत्रमोह में महाभारत हो चुका है वहां उसने अपने बेटे को मिली हुई गद्दी किसी और को दे दी। गालियां सुनी,लांछन सुने लेकिन कभी अपनी मर्यादा नही खोई।


राजीव प्रधानमंत्री के बेटे


थे वो रुतबा था उनका कि किसी भी मशहूर लड़की से शादी के लिए कहते तो खुशी-खुशी तैयार हो जाती लेकिन उन्होंने अपने प्यार को चुना। दुनिया के आगे स्वीकार किया। उस प्यार ने अपने प्यार की कद्र की। जिस परिवेश में लड़की पली थी उसमें पति के जिंदा रहते भी लड़कियां अफेयर करती हैं दूसरी शादी करती हैं लेकिन उस महिला के चरित्र पर एक भी दाग नही है।


जब तुम उसे बॉर बाला कहते हो तो तुम मनुष्यता से कई दर्जे नीचे गिर जाते हो।



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